पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: "मर्त्य मानव की विजय का तुर्य हूँ मैं, उर्वशी अपने समय का सूर्य हूँ मैं। अंध, तम के भाल पर पावक जलाता हूँ, बादलों के शीस पर स्यंदन चलाता हूँ। पर न जाने बात क्या है! इंद्र का आयुध पुरुष जो झेल सकता है, सिंह से बाँहें मिलाकर खेल सकता है। फूल के आगे वही असहाय हो जाता, शक्ति के रहते हुए निरुपाय हो जाता।" (क) प्रस्तुत पद्यांश के पाठ और रचयिता का नाम लिखिए। (ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (ग) 'स्यंदन' व 'आयुध' शब्दों के अर्थ स्पष्ट कीजिए। (घ) प्रस्तुत पंक्तियों में कौन किसको सम्बोधित करके कह रहा है? (ङ) उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा रस है?