जीवन एक संग्राम है, मत समझो यह विश्राम है,
हर दिन नई चुनौती है, हर पल एक इम्तहान है।
सुख-दुख की इस बगिया में, फूलों के संग काँटे भी हैं,
जो साहस से चलना सीखे, वही असली विजेता है।
आँधियाँ आएँगी राहों में, बाधाएँ मिलेंगी हर मोड़ पर,
मन को डगमगाने मत देना, विश्वास रखो अपने ज़ोर पर।
हर असफलता एक सीख है, हर गिरना है एक सबक,
जो गिरकर फिर उठते हैं, वही होते हैं असल में मज़बूत।
जीवन का यथार्थ यही है, संघर्ष ही सबसे बड़ा धर्म,
कभी मत रुकना इस राह में, चलो निरंतर, यही है कर्म।
मंजिल मिलेगी निश्चित ही, अगर इरादे पक्के हों,
धैर्य और मेहनत का दीप जलाओ –
सपनों के पंख खुद-ब-खुद खुलेंगे।
जीवन को संग्राम क्यों कहा गया है ?
‘सपनों के पंख खुद-ब-खुद खुलेंगे’ से अभिप्राय है :
कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाला/वाले कथन है/हैं :
I. संघर्ष ही जीवन है।
II. आनंद ही जीवन है।
III. शांति ही जीवन है।
काव्यांश के अनुसार जीवन क्या है ?
कवि के अनुसार कौन-से व्यक्ति मज़बूत होते हैं ?
कवि ने जीवन का यथार्थ किन्हें माना है ?