Comprehension

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ।

काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ।।

तुलसी सरनाम गुलामु है राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ।।

माँगि कै खैबौ, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।

Question: 1

काव्यांश का वर्ण्य विषय है –

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काव्यांश में आए 'जाति बिगार' और जाति-सूचक शब्दों पर ध्यान दीजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • समाज की आर्थिक स्थिति का वर्णन
  • जाति-पाँतिगत भेदभाव का वर्णन
  • समाज में विद्यमान भेदभाव का वर्णन
  • धर्म के नाम पर हो रहे आडंबरों का वर्णन
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझें:
यह कवित्त तुलसीदास की 'कवितावली' से लिया गया है।
इसमें तुलसी उन लोगों को उत्तर देते हैं जो उनकी जाति और कुल पर उँगली उठाते थे।

चरण 2: पंक्तियों का भाव:
'धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ' – कोई मुझे किसी भी जाति का कहे, मुझे परवाह नहीं।
'काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ' – मुझे किसी की बेटी से बेटे का विवाह नहीं करना, इसलिए किसी की जाति बिगड़ने का प्रश्न ही नहीं।
स्पष्ट है कि पूरा काव्यांश जाति-पाँति के भेदभाव पर केंद्रित है।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत:
विकल्प 1: काव्यांश में समाज की आर्थिक स्थिति का वर्णन नहीं है।
विकल्प 3: 'भेदभाव' बहुत सामान्य है, जबकि कवि विशेष रूप से जातिगत भेदभाव की बात करते हैं।
विकल्प 4: धार्मिक आडंबर का कोई उल्लेख नहीं है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 – जाति-पाँतिगत भेदभाव का वर्णन।
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Question: 2

‘काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब’ – पंक्ति के माध्यम से कटाक्ष किया गया है –

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पंक्ति में 'ब्याहब' शब्द और अगली पंक्ति के 'जाति बिगार' को जोड़कर देखिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था पर
  • जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर
  • पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता पर
  • समाज की विघटनकारी व्यवस्था पर
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: पंक्ति का अर्थ:
'काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब' का अर्थ है – मुझे किसी की बेटी से अपने बेटे का विवाह नहीं करना है।
उस समय विवाह जाति देखकर ही होते थे।

चरण 2: कटाक्ष किस पर:
तुलसी कहते हैं कि जाति की चिंता वही करे जिसे अपने बच्चों का विवाह करना हो।
इस प्रकार वे जाति के आधार पर होने वाली वैवाहिक प्रथा पर व्यंग्य करते हैं।

चरण 3: अन्य विकल्प:
विकल्प 1 सामान्य जाति व्यवस्था की बात है, पर पंक्ति विशेष रूप से विवाह से जुड़ी है।
विकल्प 3 (पुरुष प्रधान मानसिकता) और विकल्प 4 (विघटनकारी व्यवस्था) का पंक्ति से सीधा संबंध नहीं है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 – जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर।
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Question: 3

तुलसीदास स्वयं को किसका दास मानते हैं ?

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'तुलसी सरनाम गुलामु है ...' पंक्ति को पढ़िए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • नियमों का
  • परिस्थितियों का
  • स्वयं का
  • राम का
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: संबंधित पंक्ति:
काव्यांश की तीसरी पंक्ति है – 'तुलसी सरनाम गुलामु है राम को'।
इसका अर्थ है – तुलसी प्रसिद्ध रूप से राम का गुलाम (दास) है।

चरण 2: अन्य विकल्पों की जाँच:
नियमों, परिस्थितियों या स्वयं का दास होने की बात काव्यांश में कहीं नहीं है।
तुलसी समाज की परवाह न करके केवल राम की भक्ति को अपना आधार मानते हैं।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 4 – राम का।
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Question: 4

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :

कथन : परंपरावादी एवं रूढ़िग्रस्त समाज में रहते हुए भी तुलसी निर्विकार जीवन व्यतीत कर रहे थे।

कारण : वे सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त थे।

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सोचिए, तुलसी की निश्चिंतता का आधार क्या है – जिम्मेदारी से मुक्ति या राम-भक्ति?
Updated On: Oct 31, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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The Correct Option is C

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चरण 1: कथन की जाँच:
तुलसी जाति-पाँति वाले रूढ़िग्रस्त समाज में रहते थे, फिर भी लोगों की निंदा से विचलित नहीं होते।
'जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ' – जिसे जो अच्छा लगे कहे।
वे माँगकर खाते और मस्जिद में सो जाते हैं। अतः वे निर्विकार जीवन जीते थे – कथन सही है।

चरण 2: कारण की जाँच:
तुलसी के निर्विकार होने का असली कारण उनकी राम-भक्ति और संतोषी स्वभाव है।
'सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त होना' इसकी सही व्याख्या नहीं है।
उनकी निश्चिंतता का आधार 'गुलामु है राम को' वाला भाव है।

चरण 3: विकल्प मिलाएँ:
कथन सही, पर कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता – यह विकल्प 3 से मेल खाता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 – कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
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Question: 5

‘लैबोको एकु न दैबको दोऊ’ – से आशय है –

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'न लेना एक न देना दो' मुहावरे का प्रयोग किस भाव में होता है, सोचिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • न लेना एक न देना दो
  • किसी से कोई बुरी बात न कहना
  • किसी से कोई संबंध न रखना
  • बिना वजह की मुसीबत होना
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: पंक्ति का शाब्दिक अर्थ:
'लैबोको एकु न दैबको दोऊ' – न किसी से एक लेना है, न किसी को दो देना है।
यह लोक में प्रचलित मुहावरा 'न लेना एक न देना दो' है।

चरण 2: मुहावरे का आशय:
इसका भाव है – किसी से कोई लेन-देन या संबंध न रखना।
तुलसी कहते हैं कि समाज से उनका कोई वास्ता नहीं, वे केवल राम के हैं।

चरण 3: अन्य विकल्प:
विकल्प 1 केवल शाब्दिक अनुवाद है, आशय नहीं।
विकल्प 2 और 4 का पंक्ति के भाव से कोई संबंध नहीं है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 – किसी से कोई संबंध न रखना।
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