Comprehension

रात्रि की विभीषिका को सिर्फ़ पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती रहती थी। पहलवान संध्या से सुबह तक, चाहे जिस ख्याल से ढोलक बजाता हो, किंतु गाँव के अर्द्धमृत, औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन प्राणियों में वह संजीवनी शक्ति ही भरती थी। बूढ़े-बच्चे-जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था। स्पंदन-शक्ति-शून्य स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी। अवश्य ही ढोलक की आवाज़ में न तो बुखार हटाने का कोई गुण था और न महामारी की सर्वनाश शक्ति को रोकने की शक्ति ही, पर इसमें संदेह नहीं कि मरते हुए प्राणियों को आँख मूँदते समय कोई तकलीफ़ नहीं होती थी, मृत्यु से वे डरते नहीं थे।

Question: 1

‘रात्रि की विभीषिका’ से अभिप्राय है :

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विभीषिका का अर्थ भय पैदा करने वाली भीषण स्थिति है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • रात्रि का सन्नाटा
  • रात्रि का भयावहपन
  • रात्रि का अंधकार
  • रात्रि की स्पंदनहीनता
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द का अर्थ:
‘विभीषिका’ का अर्थ है भय उत्पन्न करने वाली भयंकर स्थिति। ‘रात्रि की विभीषिका’ का अर्थ हुआ रात का भयानक रूप।

चरण 2: गद्यांश से संबंध:
गद्यांश में गाँव महामारी से पीड़ित है। रात में मृत्यु का डर चारों ओर फैला रहता है, इसलिए रात भयावह लगती है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
विकल्प 1 ‘सन्नाटा’ रात की एक स्थिति है, पर विभीषिका का अर्थ नहीं। विकल्प 3 ‘अंधकार’ भी केवल रात का रंग-रूप है। विकल्प 4 ‘स्पंदनहीनता’ का अर्थ है हलचल का न होना, यह भी भय का सूचक नहीं है। विकल्प 2 ‘भयावहपन’ ठीक विभीषिका का अर्थ है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 2 : रात्रि का भयावहपन।
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Question: 2

रात्रि की विभीषिका को गाँव में कौन चुनौती देता था ?

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गद्यांश के पहले वाक्य में ही चुनौती देने वाले का नाम लिखा है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • जंगली जानवरों की आवाज़
  • रात्रि का सूनापन
  • पहलवान के लड़के
  • पहलवान की ढोलक
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पहली पंक्ति:
गद्यांश का पहला वाक्य है : ‘रात्रि की विभीषिका को सिर्फ़ पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती रहती थी।’

चरण 2: उत्तर का निर्धारण:
इस वाक्य में स्पष्ट लिखा है कि चुनौती देने वाली केवल पहलवान की ढोलक थी।

चरण 3: अन्य विकल्पों की जाँच:
जंगली जानवरों की आवाज़ और रात का सूनापन गद्यांश में चुनौती देने वाले नहीं बताए गए हैं। पहलवान के लड़कों का भी इस अंश में उल्लेख नहीं है। इसलिए विकल्प 1, 2 और 3 गलत हैं।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 4 : पहलवान की ढोलक।
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Question: 3

ढोलक की आवाज़ का गाँववालों पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में असत्य कथन है :

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जो कथन गद्यांश में नहीं है या उसके विरुद्ध है, वही असत्य होगा।
Updated On: Oct 27, 2026
  • नसों में बिजली दौड़ जाती थी।
  • उनमें संजीवनी की शक्ति भरती थी।
  • मृत्यु का सामना करने की शक्ति देती थी।
  • मृत्यु को पराजित करने की ताकत देती थी।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न की माँग:
हमें वह कथन खोजना है जो असत्य है, अर्थात जो गद्यांश से मेल नहीं खाता।

चरण 2: सत्य कथनों की जाँच:
विकल्प 1 सत्य है, क्योंकि गद्यांश में लिखा है कि स्नायुओं में बिजली दौड़ जाती थी। विकल्प 2 सत्य है, क्योंकि ढोलक प्राणियों में संजीवनी शक्ति भरती थी। विकल्प 3 सत्य है, क्योंकि मरते समय लोगों को कष्ट नहीं होता था और वे मृत्यु से डरते नहीं थे, अर्थात उसका सामना कर पाते थे।

चरण 3: असत्य कथन:
विकल्प 4 में कहा गया है कि ढोलक मृत्यु को पराजित करने की ताकत देती थी। गद्यांश में स्पष्ट लिखा है कि ढोलक में महामारी की सर्वनाश शक्ति को रोकने का गुण नहीं था। इसलिए मृत्यु को पराजित करना सत्य नहीं है।

अंतिम उत्तर:
असत्य कथन विकल्प 4 है।
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Question: 4

गद्यांश के अनुसार गाँववालों की दीन-हीन स्थिति का प्रमुख कारण था :

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गद्यांश में महामारी और मरते हुए प्राणियों का उल्लेख है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • निर्धनता
  • अतिवृष्टि
  • संक्रामक रोग
  • साधनहीनता
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश के संकेत:
गद्यांश में गाँव के प्राणियों को ‘अर्द्धमृत’ और ‘औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन’ कहा गया है। आगे ‘महामारी की सर्वनाश शक्ति’ का उल्लेख है।

चरण 2: कारण की पहचान:
गाँव वाले बीमारी और मृत्यु के भय से टूटे हुए हैं। महामारी एक संक्रामक रोग है जो बहुत लोगों को एक साथ पीड़ित करता है, इसलिए यही उनकी दीन-हीन दशा का प्रमुख कारण है।

चरण 3: अन्य विकल्प:
निर्धनता और साधनहीनता भी कठिनाई बढ़ाती हैं, पर गद्यांश में प्रमुख कष्ट महामारी का ही बताया गया है। अतिवृष्टि का तो कोई उल्लेख ही नहीं है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 3 : संक्रामक रोग।
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Question: 5

‘बिजली दौड़ जाती थी’ – का आशय है :

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बिजली दौड़ना लाक्षणिक प्रयोग है, जिसका अर्थ अचानक स्फूर्ति और चेतना आना है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • वायु का प्रवाह होने लगता था
  • रक्त का संचार होने लगता था
  • बिजली का प्रवाह होने लगता था
  • चेतना का संचार हो जाता था
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: मुहावरे जैसा प्रयोग:
‘बिजली दौड़ जाना’ यहाँ लाक्षणिक प्रयोग है। इसका अर्थ वास्तविक बिजली बहना नहीं, बल्कि अचानक स्फूर्ति आ जाना है।

चरण 2: संदर्भ:
गद्यांश में लिखा है कि शक्तिहीन स्नायुओं में भी ढोलक की आवाज़ से बिजली दौड़ जाती थी। मतलब ढोलक सुनकर शिथिल लोगों में नई चेतना और उत्साह आ जाता था।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
विकल्प 1 और 3 शाब्दिक अर्थ हैं, जो यहाँ लागू नहीं होते। विकल्प 2 में रक्त का संचार शारीरिक क्रिया है, जो हर जीवित प्राणी में पहले से चल रही है, यहाँ बात मन की जागृति की है। विकल्प 4 ‘चेतना का संचार’ ही सही भाव है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 4 : चेतना का संचार हो जाता था।
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