Comprehension

दुनिया का सबसे बड़ा अधम –

हाँ, हाँ, दुनिया का सबसे बड़ा अधम नर वही था

जिसकी ज़बान से यह निकला था पहले-पहल –

भूमि यह मेरी है !

“भूमि यह मेरी है ?”

झूठा, मक्कार था !

असत्य, अन्याय का अवतार था !

दुनिया का सबसे बड़ा अधम !!

नीचे की धरती और ऊपर का आसमान,

पानी और पवन –

प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए,

इन पर है सबका अधिकार;

सबका समान अधिकार

हवा को क्या बाँटोगे ?

पानी को बाँटोगे ?

बाँटोगे नीले आसमान को ?

बाँट भी सकोगे क्या ?

धरती बेचारी बेबस थी –

पैरों के नीचे

अचल पड़ी थी, निरीह;

कह दिया –

“भूमि यह मेरी है” –

बाँट लिया टुकड़ों में,

एक मुट्ठी लोगों ने,

मानो माता के आँचल को दाँतों से चीरकर

बाँट लिया कुछ शैतान बच्चों ने;

टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़

रोती रही दुखिया बेचारी माँ !

दुनिया का सबसे बड़ा अधम !

Question: 1

इस काव्यांश का केंद्रीय भाव है :

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‘इन पर है सबका अधिकार; सबका समान अधिकार’ पंक्ति देखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
  • प्राकृतिक संसाधनों का सृजन
  • भूमि का वैज्ञानिक वितरण
  • भूमि पर सबका समान अधिकार
  • भूमि के इतिहास का वर्णन
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: काव्यांश का सार समझना:
कवि कहता है कि जिसने सबसे पहले ‘भूमि यह मेरी है’ कहा, वह दुनिया का सबसे बड़ा अधम था।
धरती, आसमान, पानी और पवन प्रकृति की देन हैं और “इन पर है सबका अधिकार; सबका समान अधिकार।”

चरण 2: विकल्प (1) प्राकृतिक संसाधनों का सृजन:
कविता में संसाधनों को बनाने की बात नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।

चरण 3: विकल्प (2) भूमि का वैज्ञानिक वितरण:
कवि बँटवारे का विरोध करता है, वैज्ञानिक वितरण का समर्थन नहीं, इसलिए यह विकल्प गलत है।

चरण 4: विकल्प (3) भूमि पर सबका समान अधिकार:
पूरा काव्यांश इसी भाव पर टिका है कि भूमि, हवा और पानी पर सबका बराबर हक है। इसलिए यही केंद्रीय भाव है।

चरण 5: विकल्प (4) भूमि के इतिहास का वर्णन:
इतिहास का कोई वर्णन नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (3) – भूमि पर सबका समान अधिकार।
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Question: 2

“प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए” इस पंक्ति से कवि का अभिप्राय है :

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प्रकृति की देन सभी जीवों के लिए है, यानी उस पर सबका साझा हक है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • व्यक्तिगत अधिकार
  • जातीय विभाजन
  • धार्मिक आस्था
  • सामूहिक स्वामित्व
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: पंक्ति का संदर्भ:
कवि कहता है – “नीचे की धरती और ऊपर का आसमान, पानी और पवन – प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए।”
यहाँ ‘जीवमात्र के लिए’ का अर्थ है सभी जीवों के लिए।

चरण 2: विकल्प (1) व्यक्तिगत अधिकार:
कवि व्यक्ति के निजी अधिकार का विरोध करता है, इसलिए यह गलत है।

चरण 3: विकल्प (2) जातीय विभाजन और (3) धार्मिक आस्था:
काव्यांश में जाति या धर्म की कोई बात नहीं है, इसलिए ये दोनों गलत हैं।

चरण 4: विकल्प (4) सामूहिक स्वामित्व:
प्रकृति की देन सभी जीवों के लिए है, यानी उस पर सबका साझा हक है। अगली पंक्ति भी कहती है – “इन पर है सबका अधिकार।” यही सामूहिक स्वामित्व है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (4) – सामूहिक स्वामित्व।
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Question: 3

“माता के आँचल को दाँतों से चीरना” इस पंक्ति का आज के संदर्भ में सटीक अर्थ क्या है ?

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धरती माँ का हरा आँचल उसके वन हैं; उन्हें बेरहमी से नष्ट करना ही आँचल चीरना है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • जैविक खेती को प्रोत्साहन
  • वनों की अंधाधुंध कटाई
  • हरित ऊर्जा का विकास
  • जल संरक्षण योजनाएँ
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझना:
काव्यांश में कहा गया है कि कुछ लोगों ने धरती को टुकड़ों में बाँट लिया, “मानो माता के आँचल को दाँतों से चीरकर बाँट लिया कुछ शैतान बच्चों ने।”
यहाँ धरती को माँ माना गया है।

चरण 2: पंक्ति का भाव:
माँ का आँचल धरती की हरियाली, वन और प्राकृतिक संपदा का प्रतीक है। उसे दाँतों से चीरना निर्दयता से उसे नष्ट करना है।

चरण 3: आज के संदर्भ में विकल्पों की जाँच:
(1) जैविक खेती, (3) हरित ऊर्जा और (4) जल संरक्षण – ये तीनों प्रकृति की रक्षा के काम हैं, जबकि पंक्ति में विनाश का भाव है। इसलिए ये गलत हैं।
(2) वनों की अंधाधुंध कटाई – पेड़ों और जंगलों को बेरहमी से काटना धरती के आँचल को चीरने जैसा ही है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (2) – वनों की अंधाधुंध कटाई।
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Question: 4

यदि ‘भूमि यह मेरी है’ की भावना समाज में व्याप्त नहीं होगी तो दुनिया की संरचना कैसी होगी ?

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बँटवारे और स्वामित्व की भावना के बिना सब बराबर और मिल-जुलकर रहने वाले होंगे।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: प्रश्न का आशय:
कविता में ‘भूमि यह मेरी है’ का भाव स्वामित्व और बँटवारे का भाव है। प्रश्न यह है कि यदि यह भाव समाज में न फैले तो दुनिया कैसी होगी।

चरण 2: कविता के आधार पर कल्पना:
कवि के अनुसार धरती, आसमान, पानी और पवन पर सबका समान अधिकार है। यदि कोई उन्हें अपना न कहे, तो कोई किसी को उसके हिस्से से वंचित नहीं करेगा।

चरण 3: संरचना का रूप:
तब दुनिया में छीना-झपटी, शोषण और अन्याय नहीं होगा। सब मिल-बाँटकर प्रकृति के संसाधनों का उपयोग करेंगे और धरती माँ को कष्ट नहीं होगा।

अंतिम उत्तर:
यदि ‘भूमि यह मेरी है’ की भावना न होगी, तो दुनिया समानता, भाईचारे और शांति पर आधारित होगी, जहाँ सभी को प्रकृति पर बराबर अधिकार मिलेगा।
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Question: 5

‘दुनिया का सबसे बड़ा अधम’ किसे कहा गया है और क्यों ?

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जिसने पहली बार ‘भूमि यह मेरी है’ कहा, कवि ने उसी को अधम कहा है।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: काव्यांश की आरंभिक पंक्तियाँ:
कवि लिखता है – “दुनिया का सबसे बड़ा अधम नर वही था, जिसकी ज़बान से यह निकला था पहले-पहल – भूमि यह मेरी है !”
इससे उत्तर का पहला भाग मिलता है।

चरण 2: किसे कहा गया:
‘सबसे बड़ा अधम’ उस पहले व्यक्ति को कहा गया है जिसने धरती को अपनी संपत्ति कहकर उस पर निजी अधिकार जताया।

चरण 3: क्यों कहा गया:
कवि के अनुसार धरती, पानी और पवन प्रकृति की देन हैं और उन पर सबका समान अधिकार है। उस व्यक्ति ने झूठ बोला, मक्कारी की और अन्याय करके भूमि को बाँट दिया, इसलिए उसे ‘असत्य, अन्याय का अवतार’ कहा गया।

अंतिम उत्तर:
‘सबसे बड़ा अधम’ उस व्यक्ति को कहा गया जिसने पहली बार ‘भूमि यह मेरी है’ कहा, क्योंकि उसने सबकी साझी भूमि पर निजी अधिकार जताकर अन्याय की शुरुआत की।
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Question: 6

‘टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़’ पंक्ति में किन लोगों पर व्यंग्य किया गया है और क्यों ?

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अन्याय देखकर भी चुप रहने वाले ‘शरीफ़’ लोगों की निष्क्रियता पर यह व्यंग्य है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पंक्ति का संदर्भ:
कवि बताता है कि कुछ शैतान बच्चों जैसे लोगों ने धरती को बाँट लिया। उसके बाद लिखा है – “टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़।”

चरण 2: किन पर व्यंग्य:
यहाँ ‘शरीफ़’ उन सज्जन और भले दिखने वाले लोगों को कहा गया है जिन्होंने अन्याय होते हुए देखा, पर कुछ नहीं किया। व्यंग्य उन्हीं चुप रहने वाले लोगों पर है।

चरण 3: क्यों:
अन्याय को देखकर चुप रहना भी एक तरह से उसमें साथ देना है। शरीफ़ लोग विरोध करने का साहस नहीं जुटा सके, इसलिए एक मुट्ठी भर लोग धरती पर कब्ज़ा कर बैठे और माँ रोती रही।

अंतिम उत्तर:
इस पंक्ति में उन तथाकथित शरीफ़ और निष्क्रिय लोगों पर व्यंग्य है जो अन्याय देखकर भी चुप रहे और उसका विरोध नहीं कर पाए।
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