सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना
मैं पेंच को खोलने के बजाए
उसे बेतरह कसता चला जा रहा था
क्योंकि इस करतब पर मुझे
साफ़ सुनाई दे रही थी
तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह।
आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था
ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी !
हारकर मैंने उसे कील की तरह
उसी जगह ठोंक दिया।
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए :
| कॉलम-I | कॉलम-II |
|---|---|
| 1. बात का पेंच खोलना | (i) बात का प्रभावहीन हो जाना |
| 2. बात की चूड़ी मर जाना | (ii) बात में कसावट का न होना |
| 3. पेंच को कील की तरह ठोंक देना | (iii) बात को सहज और स्पष्ट करना |
कवि को किस बात का डर था ?
‘इस करतब’ के माध्यम से कवि ने किस ओर संकेत किया है ?
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : बात का सही शब्द से जुड़ना ही सहज भावाभिव्यक्ति है।
कारण : प्रत्येक अभिव्यक्ति के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं, अत: भाषा के प्रयोग में चमत्कार प्रदर्शन से परे अत्यन्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाही में कौन-सा भाव है ?