Comprehension

भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं। वह सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं बन सकती; पर ‘नरो वा कुंजरो वा’ कहने में भी विश्वास नहीं करती। मेरे इधर-उधर पड़े पैसे-रुपये, भंडार-घर की किसी मटकी में कैसे अंतरहित हो जाते हैं, यह रहस्य भी भक्तिन जानती है। पर, उस संबंध में किसी के संकेत करते ही वह उसे शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दे डालती है, जिसको स्वीकार कर लेना किसी तर्क-शिरोमणि के लिए संभव नहीं। यह उसका अपना घर ठहरा, पैसा-रुपया जो इधर-उधर पड़ा देखा, सँभालकर रख लिया। यह क्या चोरी है ! उसके जीवन का परम कर्तव्य मुझे प्रसन्न रखना है – जिस बात से मुझे क्रोध आ सकता है, उसे बदलकर इधर-उधर करके बताना, क्या झूठ है। इतनी चोरी और इतना झूठ तो धर्मराज महाराज में भी होगा, नहीं तो भगवान जी कैसे प्रसन्न रख सकते और संसार को कैसे चला सकते !

Question: 1

गद्यांश में ‘नरो वा कुंजरो वा’ का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है ?

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लेखिका यह उल्लेख किसके स्वभाव को बताने के लिए कर रही हैं, यह सोचिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • महाभारत के प्रसंग से अवगत कराने के लिए
  • भक्तिन को युधिष्ठिर के समकक्ष रखने के लिए
  • भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
  • भक्तिन को युधिष्ठिर से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश में लिखा है: ‘वह सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं बन सकती; पर नरो वा कुंजरो वा कहने में भी विश्वास नहीं करती।’
यह बात महादेवी वर्मा भक्तिन के स्वभाव के बारे में कह रही हैं।

चरण 2: सही विकल्प क्यों:
इस उल्लेख से पता चलता है कि भक्तिन न पूरी तरह सत्यवादी है, न गोलमोल बात करती है।
वह अपने ढंग से बातों को बदलकर बताती है।
यह उसकी चारित्रिक विशेषता है, अतः विकल्प (3) सही है।

चरण 3: अन्य विकल्प गलत क्यों:
(1) लेखिका महाभारत की कथा नहीं सुना रहीं, केवल तुलना कर रही हैं।
(2) और (4) भक्तिन को युधिष्ठिर के बराबर या उनसे श्रेष्ठ सिद्ध करना उद्देश्य नहीं है।

अंतिम उत्तर:
(3) भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
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Question: 2

भक्तिन घर में पड़े पैसों को मटकी में छिपाकर किस उद्देश्य से रखती थी ?

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गद्यांश में भक्तिन अपने बचाव में जो तर्क देती है, उसमें ‘सँभालकर’ शब्द खोजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • पैसों को सँभालकर रखने
  • अन्य सेवकों की दृष्टि से बचाने
  • आपातकाल में काम आने
  • स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ समझने
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश में भक्तिन का तर्क है: ‘यह उसका अपना घर ठहरा, पैसा-रुपया जो इधर-उधर पड़ा देखा, सँभालकर रख लिया। यह क्या चोरी है!’

चरण 2: सही विकल्प:
भक्तिन घर को अपना मानती थी और पैसों को इधर-उधर पड़ा देखकर उन्हें सँभालकर रख देती थी।
अतः विकल्प (1) ‘पैसों को सँभालकर रखने’ सही है।

चरण 3: अन्य विकल्प गलत क्यों:
(2) अन्य सेवकों से बचाने की कोई बात गद्यांश में नहीं है।
(3) आपातकाल का कोई उल्लेख नहीं है।
(4) दूसरों से श्रेष्ठ समझने की बात भी गद्यांश में नहीं है।

अंतिम उत्तर:
(1) पैसों को सँभालकर रखने
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Question: 3

‘थोड़ा बहुत झूठ बोलना’ के समर्थन में भक्तिन अपना आदर्श किसे मानती थी ?

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गद्यांश के अंतिम वाक्य में आए ‘धर्मराज महाराज’ पर ध्यान दीजिए; लोक-भाषा में धर्मराज को किस नाम से जाना जाता है?
Updated On: Oct 31, 2026
  • हरिश्चंद्र
  • यमराज
  • युधिष्ठिर
  • महादेवी
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति खोजना:
गद्यांश के अंत में भक्तिन अपने थोड़े-बहुत झूठ और चोरी के बचाव में कहती है कि इतना झूठ और इतनी चोरी तो धर्मराज महाराज में भी होगी।
यानी वह अपने झूठ के समर्थन में ‘धर्मराज’ को अपना आदर्श बताती है।

चरण 2: धर्मराज कौन:
लोक-भाषा में ‘धर्मराज’ वह देवता हैं जो मृत्यु के बाद जीव के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करते हैं, यानी यमराज।
भक्तिन गाँव की सीधी-सादी स्त्री है, इसलिए वह इसी लोक-प्रचलित अर्थ में ‘धर्मराज महाराज’ कहती है।
अतः विकल्प (2) यमराज सही है।

चरण 3: अन्य विकल्प:
(1) हरिश्चंद्र पूर्ण सत्यवादी थे; भक्तिन स्वयं कहती है कि वह हरिश्चंद्र नहीं बन सकती।
(3) युधिष्ठिर का संकेत ‘नरो वा कुंजरो वा’ से जुड़ा है, पर भक्तिन उसे भी नहीं मानती (‘नरो वा कुंजरो वा’ कहने में भी विश्वास नहीं करती)।
(4) महादेवी लेखिका हैं, जिन्हें प्रसन्न रखना भक्तिन का कर्तव्य है, आदर्श नहीं।

अंतिम उत्तर:
(2) यमराज
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Question: 4

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए :

कथन : भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा।

कारण : समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करती थी।

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भक्तिन को अच्छा कहना कठिन क्यों है, इसका उत्तर गद्यांश में खोजिए और कारण से मिलाइए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • कारण सही है किंतु कथन गलत है।
  • कथन सही है किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: कथन की जाँच:
गद्यांश की पहली पंक्ति है: ‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं।’
अतः कथन सही है।

चरण 2: कारण की जाँच:
भक्तिन पैसे मटकी में छिपा देती थी और जिस बात से क्रोध आए उसे ‘बदलकर इधर-उधर करके’ बताती थी।
यानी वह परिस्थिति के अनुसार तथ्यों में जोड़-घटाव करती थी, अतः कारण भी सही है।

चरण 3: संबंध:
तथ्य बदलना ही उसका दुर्गुण है, जिसके कारण उसे पूरी तरह अच्छा कहना कठिन है।
इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प (1), (2), (3) गलत हैं।

अंतिम उत्तर:
(4) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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Question: 5

महादेवी जी के क्रोध से बचने के लिए भक्तिन क्या करती थी ?

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गद्यांश में ‘क्रोध’ शब्द वाली पंक्ति पढ़िए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • खूब मन लगाकर काम करती थी
  • बातों को ढालकर बताती थी
  • उनके सामने नहीं आती थी
  • बातों को स्पष्ट रूप से बताती थी
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश में लिखा है: ‘जिस बात से मुझे क्रोध आ सकता है, उसे बदलकर इधर-उधर करके बताना, क्या झूठ है।’

चरण 2: सही विकल्प:
भक्तिन महादेवी के क्रोध से बचने के लिए बातों को बदलकर, अर्थात ढालकर बताती थी।
अतः विकल्प (2) सही है।

चरण 3: अन्य विकल्प गलत क्यों:
(1) मन लगाकर काम करने की बात इस संदर्भ में नहीं है।
(3) उनके सामने न आने का उल्लेख नहीं है।
(4) स्पष्ट रूप से बताना तो उसके स्वभाव के विपरीत है।

अंतिम उत्तर:
(2) बातों को ढालकर बताती थी
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