Comprehension

जो नहीं हो सके पूर्ण-काम

मैं उनको करता हूँ प्रणाम

कुछ कुंठित औ' कुछ लक्ष्य-भ्रष्ट

जिनके अभिमंत्रित तीर हुए;

रण की समाप्ति के पहले ही

जो वीर रिक्त तूणीर हुए !

– उनको प्रणाम !

जो छोटी-सी नैया लेकर

उतरे करने को उदधि-पार;

मन की मन में ही रही, स्वयं

हो गए उसी में निराकार !

– उनको प्रणाम !

जो उच्च शिखर की ओर बढ़े

रह-रह नव-नव उत्साह भरे;

पर कुछ ने ले ली हिम-समाधि

कुछ असफल ही नीचे उतरे !

– उनको प्रणाम !

एकाकी और अकिंचन हो

जो भू-परिक्रमा को निकले;

हो गए पंगु, प्रति-पद जिनके

इतने अदृष्ट के दाव चले !

– उनको प्रणाम !

कृत-कृत्य नहीं जो हो पाए;

प्रत्युत फाँसी पर गए झूल

कुछ ही दिन बीते हैं, फिर भी

यह दुनिया जिनको गई भूल

– उनको प्रणाम !

Question: 1

‘रिक्त तूणीर’ होने का अभिप्राय है –

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तूणीर का अर्थ तरकश है। खाली तरकश का अर्थ है कि लड़ने के साधन समाप्त हो गए।
Updated On: Oct 27, 2026
  • अनुभवहीन
  • विफल
  • कुंठित
  • साधनहीन
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द का अर्थ:
‘तूणीर’ का अर्थ है तरकश, जिसमें तीर रखे जाते हैं। ‘रिक्त’ का अर्थ है खाली। इस प्रकार ‘रिक्त तूणीर’ यानी वह योद्धा जिसका तरकश खाली हो गया।

चरण 2: काव्यांश में प्रयोग:
पंक्ति है – ‘रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए’। युद्ध खत्म होने से पहले ही जिनके तीर समाप्त हो गए, उनके पास लड़ने के साधन ही नहीं बचे।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) अनुभवहीन – अनुभव की कमी की बात नहीं है। (2) विफल – यह परिणाम है, ‘रिक्त तूणीर’ का सीधा अर्थ नहीं। (3) कुंठित – इसका प्रयोग अलग से पंक्ति में हुआ है। (4) साधनहीन – तीर रूपी साधन खत्म हो जाना, यही सही है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प (4) साधनहीन है।
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Question: 2

काव्यांश में ‘हिम समाधि’ शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है ?

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हिम का अर्थ बर्फ और समाधि का अर्थ यहाँ मृत्यु है। पर्वतारोही के संदर्भ में यह बर्फ में दबकर मरना है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • बर्फीले प्रदेश के कष्टों को झेलना
  • बर्फ के नीचे दबकर मर जाना
  • बर्फ जैसी श्वेत समाधि बनाना
  • बर्फ का ऊँचा शिखर चढ़ना
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग देखना:
तीसरे बंद में कवि उन पर्वतारोहियों को प्रणाम करता है जो ‘उच्च शिखर की ओर बढ़े’ थे। उनमें से ‘कुछ ने ले ली हिम-समाधि’ और कुछ असफल होकर नीचे उतर आए।

चरण 2: शब्द का अर्थ:
‘हिम’ का अर्थ बर्फ और ‘समाधि’ का अर्थ यहाँ अंतिम विश्राम या मृत्यु है। पर्वत पर चढ़ाई में जो बर्फ में दबकर प्राण त्याग देते हैं, उनके लिए यह शब्द प्रयुक्त हुआ है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) कष्ट झेलना – कष्ट झेलने वाले जीवित भी रहते हैं, जबकि समाधि मृत्यु का संकेत है। (2) बर्फ के नीचे दबकर मर जाना – सही। (3) श्वेत समाधि बनाना – यहाँ समाधि बनाने की बात नहीं है। (4) शिखर चढ़ना – चढ़ना पहले की क्रिया है, समाधि उसका परिणाम है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प (2) है।
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Question: 3

‘छोटी-सी नैया’ और ‘उदधि-पार’ का प्रतीकार्थ है –

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नैया साधन का और सागर पार करना बड़े लक्ष्य का प्रतीक है। प्रतीकार्थ पूछा है, शब्दार्थ नहीं।
Updated On: Oct 27, 2026
  • छोटी नाव, विशाल सागर
  • सीमित साधन, विशाल लक्ष्य
  • कम मेहनत, अधिक सफलता
  • छोटी नौका, बड़ा जहाज
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
दूसरे बंद में कहा गया है – ‘जो छोटी-सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि-पार’। कवि उन लोगों को प्रणाम करता है जो साधारण साधन लेकर बड़े लक्ष्य को पाने निकले।

चरण 2: प्रतीक का अर्थ:
‘छोटी-सी नैया’ सीमित साधनों का प्रतीक है और ‘उदधि-पार’ (सागर को पार करना) बहुत बड़े, कठिन लक्ष्य का प्रतीक है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) छोटी नाव, विशाल सागर – यह शब्दार्थ है, प्रतीकार्थ नहीं। (2) सीमित साधन, विशाल लक्ष्य – सही प्रतीकार्थ। (3) कम मेहनत, अधिक सफलता – कवि मेहनत की कमी नहीं, साधन की कमी बताता है। (4) छोटी नौका, बड़ा जहाज – यह भी शाब्दिक और काव्यांश से बाहर है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प (2) सीमित साधन, विशाल लक्ष्य है।
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Question: 4

कवि किन लोगों को प्रणाम कर रहा है ?

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पहली दो पंक्तियों में उत्तर है – जो पूर्ण-काम नहीं हो सके, कवि उनको प्रणाम करता है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: आरंभ की पंक्तियाँ:
काव्यांश की पहली दो पंक्तियाँ हैं – ‘जो नहीं हो सके पूर्ण-काम, मैं उनको करता हूँ प्रणाम।’ इनसे स्पष्ट है कि कवि उन्हें प्रणाम करता है जिनकी कामना पूरी नहीं हो सकी।

चरण 2: किन-किन लोगों को:
कवि उन वीरों को प्रणाम करता है जिनके तीर युद्ध से पहले चुक गए, उन्हें जो छोटी नाव से सागर पार करने निकले, उन पर्वतारोहियों को जो शिखर की ओर बढ़े, उन्हें जो अकेले पृथ्वी की परिक्रमा पर निकले, और उन बलिदानियों को जो फाँसी पर झूल गए।

अंतिम उत्तर:
कवि उन संघर्षशील लोगों को प्रणाम करता है जो बड़े लक्ष्य के लिए निकले, पर परिस्थितियों के कारण अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए।
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Question: 5

‘हो गए उसी में निराकार’ कथन का क्या तात्पर्य है ? काव्यांश के आधार पर लिखिए।

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निराकार का अर्थ है आकारहीन यानी मिट जाना। पंक्ति के साथ ‘मन की मन में ही रही’ को भी जोड़कर समझिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति दूसरे बंद की है – ‘जो छोटी-सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि-पार; मन की मन में ही रही, स्वयं हो गए उसी में निराकार।’ इसमें उन साहसी लोगों का वर्णन है जो साधारण साधनों से बड़ा लक्ष्य पाने निकले।

चरण 2: पंक्ति का भाव:
‘निराकार’ का अर्थ है बिना आकार का, अर्थात जिसका अस्तित्व दिखाई न दे। ‘उसी में’ का आशय उसी इच्छा या सागर में है।
तात्पर्य यह है कि उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई, वह उनके मन में ही रह गई और वे स्वयं भी अपनी साधना में खोकर मिट गए।

चरण 3: निष्कर्ष:
इस कथन से कवि यह बताता है कि बड़े सपनों के लिए निकले लोगों का अंत हुआ और उनका नाम-निशान तक नहीं बचा।

अंतिम उत्तर:
इसका तात्पर्य है कि लक्ष्य पाने की इच्छा उनके मन में ही रह गई और वे स्वयं उसी प्रयास में विलीन होकर अस्तित्वहीन हो गए।
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Question: 6

कवि के अनुसार प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष करने के बाद भी दुनिया उन लोगों को क्यों भूल गई ?

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अंतिम बंद की पंक्तियाँ पढ़िए – ‘कृत-कृत्य नहीं जो हो पाए’ और ‘यह दुनिया जिनको गई भूल’। सफलता न मिलना ही मुख्य कारण है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
अंतिम बंद में कवि उन बलिदानियों की बात करता है जो ‘कृत-कृत्य नहीं जो हो पाए’ और ‘फाँसी पर गए झूल’। कवि कहता है – ‘कुछ ही दिन बीते हैं, फिर भी यह दुनिया जिनको गई भूल।’

चरण 2: भूलने के कारण:
पहला कारण – वे अपने लक्ष्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। संसार प्रायः सफल और विजयी लोगों को ही याद रखता है।
दूसरा कारण – संसार स्वार्थी है और वर्तमान में डूबा रहता है, इसलिए त्याग करने वालों को बहुत जल्दी भुला देता है।

चरण 3: कवि की पीड़ा:
कवि को दुख है कि इतना संघर्ष और बलिदान करने के बाद भी इन लोगों को वह स्मरण नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। इसी कारण वह बार-बार ‘उनको प्रणाम’ कहता है।

अंतिम उत्तर:
दुनिया उन्हें इसलिए भूल गई कि वे अपने लक्ष्य में सफल नहीं हुए और संसार सफलता को ही याद रखता है तथा बलिदानियों को बहुत शीघ्र भुला देता है।
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