छोटा मेरा खेत चौकोना
कागज़ का एक पन्ना,
कोई अंधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज वहाँ बोया गया।
कल्पना के रसायनों को पी
बीज गल गया नि:शेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।
‘छोटा मेरा खेत’ कविता के मूल भाव के बारे में सही कथन है :
कविता की रचना-प्रक्रिया के संदर्भ में ‘अंधड़’ क्या है ?
कवि अपने छोटे खेत में कौन-से बीज बोता है ?
कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है ?
‘कटाई अनंतता की’ का प्रतीकार्थ है :