Comprehension

फूल से बोली कली क्यों व्यस्त मुरझाने में है

फ़ायदा क्या गंध औ मकरंद बिखराने में है

तूने अपनी उम्र क्यों वातावरण में घोल दी

अपनी मनमोहक पँखुरियों की छटा क्यों खोल दी

तू स्वयं को बाँटता है जिस घड़ी से तू खिला

किन्तु इस उपकार के बदले में तुझको क्या मिला

मुझको देखो मेरी सब खुशबू मुझ ही में बंद है

मेरी सुंदरता है अक्षय अनछुआ मकरंद है

मैं पली काँटों में जब थी दुनिया तब सोती रहीं

मेरी ही क्या ये कभी किसी की भी कभी होती नहीं

ऐसी दुनिया के लिए सौरभ लुटाऊँ किसलिए

स्वार्थी समुदाय का मेला लगाऊँ किसलिए

फूल उस नादान की वाचालता पर चुप रहा

फिर स्वयं को देखकर भोली कली से ये कहा

ज़िंदगी सिद्धांत की सीमाओं में बँटती नहीं

ये वो पूँजी है जो व्यय से बढ़ती है घटती नहीं

Question: 1

फूल और कली के संवाद के माध्यम से कवि ने स्पष्ट किया है :

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अंतिम दो पंक्तियाँ पढ़िए। बाँटने से जीवन की पूँजी बढ़ती है, यही जीवन की सार्थकता है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • जीवन की सार्थकता को
  • जीवन की क्षणभंगुरता को
  • जीवन की नश्वरता को
  • जीवन के दृष्टिकोण को
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: काव्यांश का भाव:
काव्यांश में कली और फूल बातचीत करते हैं। कली अपनी सुगंध और सुंदरता को अपने भीतर बंद रखना चाहती है और फूल के बाँटने को व्यर्थ मानती है।

चरण 2: फूल का उत्तर:
अंत में फूल कहता है – ‘ज़िंदगी सिद्धांत की सीमाओं में बँटती नहीं, ये वो पूँजी है जो व्यय से बढ़ती है घटती नहीं।’ अर्थात जीवन दूसरों के काम आने से ही सार्थक होता है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
विकल्प 2 और 3 (क्षणभंगुरता, नश्वरता) ग़लत हैं, क्योंकि कवि जीवन के नष्ट होने पर बल नहीं देता। विकल्प 4 में दृष्टिकोण कहा गया है, पर कवि का मुख्य निष्कर्ष यह है कि लुटाने और बाँटने से जीवन की सार्थकता बढ़ती है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 – जीवन की सार्थकता को।
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Question: 2

काव्यांश के अनुसार कौन-सी पूँजी बाँटने से बढ़ती है ?

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अंतिम पंक्ति में ‘ये वो पूँजी’ ज़िंदगी के लिए आया है, जो व्यय से बढ़ती है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • ज्ञान
  • ज़िंदगी
  • संपदा
  • दुख
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: संबंधित पंक्तियाँ:
काव्यांश की अंतिम दो पंक्तियाँ हैं – ‘ज़िंदगी सिद्धांत की सीमाओं में बँटती नहीं, ये वो पूँजी है जो व्यय से बढ़ती है घटती नहीं।’

चरण 2: अर्थ:
यहाँ ‘ये वो पूँजी’ का संकेत ‘ज़िंदगी’ की ओर है। व्यय का अर्थ खर्च करना या लुटाना है। अर्थात जो जीवन दूसरों के लिए लुटाया जाता है, वह बढ़ता है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
ज्ञान की बात काव्यांश में कहीं नहीं आई। संपदा और दुख का भी उल्लेख इस रूप में नहीं है। केवल ज़िंदगी को ही पूँजी कहा गया है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 – ज़िंदगी।
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Question: 3

काव्यांश के संदर्भ में ‘वाचालता’ शब्द का अर्थ है :

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‘वाचाल’ का अर्थ बहुत बोलने वाला है। इसलिए वाचालता यानी बड़बोलापन।
Updated On: Oct 27, 2026
  • चालाकी
  • समझदारी
  • बड़बोलापन
  • मूर्खता
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द की बनावट:
‘वाचालता’ शब्द ‘वाचाल’ से बना है, जिसका अर्थ है बहुत बोलने वाला। ‘वाचाल’ में ‘वाच्’ यानी वाणी या बोलना है, और ‘ता’ भाववाचक प्रत्यय है।

चरण 2: संदर्भ में देखना:
काव्यांश में लिखा है – ‘फूल उस नादान की वाचालता पर चुप रहा।’ कली ने बहुत कुछ कहा था, जबकि फूल शांत रहा। इसलिए यहाँ वाचालता का अर्थ बढ़-चढ़कर बोलना है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
चालाकी, समझदारी और मूर्खता – इनमें से कोई भी बहुत बोलने का अर्थ नहीं देता। बड़बोलापन का अर्थ है ज़रूरत से ज़्यादा या बढ़ा-चढ़ाकर बोलना, जो यहाँ ठीक बैठता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 – बड़बोलापन।
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Question: 4

कली और फूल के व्यक्तित्व में क्या अंतर है ?

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कली अपनी खुशबू अपने पास रखना चाहती है, फूल उसे सबमें बाँटता है। स्वार्थ और परोपकार का अंतर लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: कली का व्यक्तित्व:
कली स्वार्थी और आत्मकेंद्रित है। वह कहती है – ‘मुझको देखो मेरी सब खुशबू मुझ ही में बंद है।’ वह अपनी सुंदरता और सुगंध किसी को देना नहीं चाहती, दुनिया को स्वार्थी मानती है और अभी नादान तथा भोली है।

चरण 2: फूल का व्यक्तित्व:
फूल परोपकारी और उदार है। वह खिलने के क्षण से ही अपनी सुगंध और सुंदरता सबको बाँटता है। कली की बातों पर वह क्रोधित नहीं होता, चुप रहकर धैर्य दिखाता है।

चरण 3: अंतर:
कली बाँटने में हानि देखती है, जबकि फूल बाँटने में जीवन की सार्थकता देखता है। कली संकुचित सोच वाली है, फूल व्यापक और अनुभवी सोच वाला है।

अंतिम उत्तर:
कली स्वार्थी, संकीर्ण और अनुभवहीन है; फूल परोपकारी, उदार, धैर्यवान और समझदार है।
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Question: 5

कली अपना सौंदर्य और महक किसी के साथ क्यों नहीं बाँटना चाहती ?

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कली के कथन देखिए – दुनिया स्वार्थी है और बाँटने का बदला कुछ नहीं मिलता, इसलिए वह नहीं बाँटना चाहती।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: काव्यांश से कारण:
कली कहती है – ‘मुझको देखो मेरी सब खुशबू मुझ ही में बंद है, मेरी सुंदरता है अक्षय अनछुआ मकरंद है।’ वह अपनी सुगंध और सुंदरता को सुरक्षित रखना चाहती है।

चरण 2: दुनिया से शिकायत:
कली मानती है कि जब वह काँटों के बीच पल रही थी, तब दुनिया सोती रही। उसके अनुसार यह दुनिया किसी की भी अपनी नहीं होती और यहाँ स्वार्थी लोगों का मेला लगा है।

चरण 3: बदले की चिंता:
वह फूल से पूछती है कि सब कुछ बाँटकर बदले में क्या मिला। उसे लगता है कि सुगंध लुटाने से केवल हानि होती है और कोई उपकार का मूल्य नहीं समझता।

अंतिम उत्तर:
कली स्वार्थी और कृतघ्न समझी जाने वाली दुनिया पर भरोसा नहीं करती, इसलिए वह अपना सौंदर्य और महक किसी के साथ नहीं बाँटना चाहती।
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Question: 6

कली अथवा फूल, आप किसके विचारों से सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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कोई एक पक्ष चुनकर उसके दो कारण लिखिए। फूल का पक्ष लेना सरल है क्योंकि कवि का निष्कर्ष भी वही है।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: अपना पक्ष चुनना:
मैं फूल के विचारों से सहमत हूँ।

चरण 2: तर्क:
फूल का कहना है कि ज़िंदगी वह पूँजी है जो व्यय से बढ़ती है, घटती नहीं। जब हम अपना ज्ञान, समय, प्रेम और सहयोग दूसरों को देते हैं, तो समाज में हमें सम्मान और संतोष मिलता है। वही जीवन का वास्तविक लाभ है।

चरण 3: कली के विचार की कमी:
कली अपनी सुंदरता को बंद रखना चाहती है, पर बंद रखी सुगंध और सुंदरता किसी के काम नहीं आती और स्वयं भी व्यर्थ चली जाती है।

अंतिम उत्तर:
मैं फूल से सहमत हूँ, क्योंकि दूसरों के लिए लुटाने से ही जीवन सार्थक बनता है।
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