पुत्र वियोग का असर माँ के जीवन पर गहरे रूप से पड़ता है। उसकी मनोस्थिति एक शून्यता और अवसाद में बदल जाती है, जिससे उसका जीवन सूना-सूना सा लगने लगता है।
माँ के लिए पुत्र केवल संतान नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा सहारा, सुख और जीवन का आधार होता है। जब पुत्र उससे दूर हो जाता है या उससे छिन जाता है, तो माँ के मन में एक गहरा दुख और तन्हाई छा जाती है। वह अकेलापन और बेचैनी महसूस करने लगती है, जिससे उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति कमजोर हो जाती है।
यह वियोग माँ के जीवन में एक खालीपन छोड़ देता है, जो न केवल उसकी दिनचर्या को प्रभावित करता है, बल्कि उसके संपूर्ण अस्तित्व को भी प्रभावित करता है। उसकी आँखों में उदासी, दिल में पीड़ा और जीवन में निराशा व्याप्त हो जाती है।
इस प्रकार, पुत्र वियोग माँ के जीवन में एक गंभीर मानसिक और भावनात्मक आघात के रूप में सामने आता है, जो उसकी समस्त जीवनशैली को प्रभावित करता है और उसे अवसाद की स्थिति में ले आता है।