निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
भारत और अफ्रीका के अधिकांश इलाकों को यदि छोड़ दें तो समूची दुनिया बुढ़ापे की ओर बढ़ चली है। जैसे-जैसे दुनिया बूढ़ी होती जा रही है श्रम बल की भयंकर कमी का सामना करने लगी है, यहाँ तक कि उत्पादकता में भी कमी आने लगी है। ऐसे में 'सिल्वर जेनरेशन (रजत पीढ़ी) एक बहुमूल्य जनसांख्यिकीय समूह साबित हो सकती है। इससे न सिर्फ मौजूदा चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलेगी, बल्कि समाज के कामकाज का तरीका भी बदल सकता है। विश्व के कई देशों में नए उद्यमियों का बड़ा हिस्सा इसी रजत पीढ़ी का है और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के कार्य-बल में इनकी हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है। ऐसे में, सरकारों और कंपनियों को मिलकर आधुनिक कार्य-बल में 'उम्रदराज’ लोगों को शामिल करने पर जोर देना चाहिए।
बेशक उम्र के अंतर को पाटने के लिए प्रवासन को बतौर निदान पेश किया जाता है, पर यह तरीका अब राजनीतिक मसला बनने लगा है और अपनी लोकप्रियता भी खोता जा रहा है । इसीलिए, सरकारों को रजत पीढ़ी की ओर सोचना चाहिए। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी बुजुर्ग काम के योग्य होते हैं या उचित अवसर मिलने पर काम पर लौट आते हैं । इनके अनुभवों का बेहतर उपयोग हो सके, इसके लिए नियोक्ताओं और सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए । रजत पीढ़ी को प्रभावी रूप से योगदान देने के लिए सशक्त और प्रशिक्षित किया जाए।
कारोबारी लाभ के अतिरिक्त, इसके सामाजिक लाभ भी हैं, जैसे वृद्ध लोगों का स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कम होता है | जो दिमाग सक्रिय रहता है, वह समस्याओं को सुलझाने और दूसरों के साथ बातचीत करने का आदी होता है, जिसका कारण उसका क्षय तुलनात्मक रूप से धीमा होता है । सेहतमंद बने रहने की भावना शरीर पर भी सकारात्मक असर डालती है और बाहरी मदद की जरूरत कम पड़ती है।
रजत पीढ़ी का ज्ञान और अनुभव अर्थव्यवस्था को नए कारोबार स्थापित करने, नई चीजें सीखने और दूसरे करियर को अपनाने के अनुकूल बनाता है । जैसे-जैसे जन्म-दर में गिरावट आ रही है, कार्य-बल की दरकार दुनिया को होने लगी है और इसका एकमात्र विकल्प रजत पीढ़ी के जनसांख्यिकीय लाभांश पर भरोसा करना है ।
निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥
बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, जरा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।
नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।
ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।
परंपरागत भोजन को लोकप्रिय कैसे बनाया जा सकता है ?
i. उपलब्ध करवाकर
ii. प्रचार-प्रसार द्वारा
iii. बिक्री की विशेष व्यवस्था करके
iv. घर-घर मुफ्त अभियान चलाकर विकल्प:
बार-बार आती है मुखाकृति मधुर, याद बचपन तेरी।
गया ले गया तू जीवन की सबसे मधुर खुशी मेरी।
चिंता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्बंध स्वच्छंद।
कैसे भुला जा सकता है बचपन का अद्भुत आनंद।
ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआ-छूत किसे कहते?
बनी हुई थी वहीं झोपड़ी और सीपियों से नावें।
रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे।
बड़े-बड़े मोती सी आँसू, चुपचाप बहा जाते थे।
वह सुख जो साधारण जीवन छोड़कर महत्वाकांक्षाएँ बड़ी हुईं।
टूट गईं कुछ खो गईं हुई-सी दौड़-धूप घर खड़ी हुईं।
नाटक की तरह एकांकी में चरित्र अधिक नहीं होते। यहाँ प्रायः एक या अधिक चरित्र नहीं होते। चरित्रों में भी केवल नायक की प्रधानता रहती है, अन्य चरित्र उसके व्यक्तित्व का प्रसार करते हैं। यही एकांकी की विशेषता है कि नायक सर्वत्र प्रमुखता पाता है। एकांकी में घटनाएँ भी कम होती हैं, क्योंकि सीमित समय में घटनाओं को स्थान देना पड़ता है। हास्य, व्यंग्य और बिंब का काम अक्सर चरित्रों और नायक के माध्यम से होता है। एकांकी का नायक प्रभावशाली होना चाहिए, ताकि पाठक या दर्शक पर गहरा छाप छोड़ सके।
इसके अलावा, घटनाओं के उद्भव-पतन और संघर्ष की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि नायक ही संपूर्णता में कथा का वाहक होता है। यही कारण है कि नाटकों की तरह इसमें अनेक पात्रों का कोई बड़ा-छोटा संघर्ष नहीं होता। नायक के लिए सर्वगुणसंपन्न होना भी आवश्यक नहीं होता। वह साधारण जीवन जीता हुआ व्यक्ति भी हो सकता है।
इस गद्यांश से यह स्पष्ट होता है कि एकांकी में चरित्रों की संख्या सीमित होती है, नायक अधिक प्रभावशाली होता है और बाहरी संघर्ष बहुत कम दिखाया जाता है।
A racing track is built around an elliptical ground whose equation is given by \[ 9x^2 + 16y^2 = 144 \] The width of the track is \(3\) m as shown. Based on the given information answer the following: 
(i) Express \(y\) as a function of \(x\) from the given equation of ellipse.
(ii) Integrate the function obtained in (i) with respect to \(x\).
(iii)(a) Find the area of the region enclosed within the elliptical ground excluding the track using integration.
OR
(iii)(b) Write the coordinates of the points \(P\) and \(Q\) where the outer edge of the track cuts \(x\)-axis and \(y\)-axis in first quadrant and find the area of triangle formed by points \(P,O,Q\).