निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जहाँ भूमि पर पड़ा कि
सोना धँसता, चाँदी धँसती
धँसती ही जाती पृथ्वी में
बड़ों–बड़ों की हस्ती।
शक्तिवान जो हुआ कि
बैठा भू पर आसन मारे
खा जाते हैं उसको
मिट्टी के ढेले हत्यारे।
मातृभूमि है उसकी, जिसका
उठके जीना होता है,
दहन–भूमि है उसकी, जो
क्षण–क्षण गिरता जाता है,
भूमि खींचती है मुझको भी
नीचे धीरे–धीरे
किंतु लहराता हूँ मैं नभ पर
शीतल–मंद–समीर।
काला बादल आता है
गुरु गर्जन स्वर भरता है
विद्रोही–मस्तक पर वह
अभिषेक किया करता है।
विद्रोही हैं हमीं, हमारे
फूलों से फल आते हैं
और हमारी कुरबानी पर
जड़ भी जीवन पाते हैं।