'वाल्मीकि' शब्द शुद्ध है। 'अभीनेत्री' को 'अभिनेत्री' होना चाहिए, 'संवीधान' को 'संविधान' और 'साहीत्य' को 'साहित्य' होना चाहिए।
शुद्धता का अर्थ है भाषा के नियमों और मान्यताओं के अनुसार सही शब्दों का प्रयोग। 'वाल्मीकि' शब्द संस्कृत मूल का सही और मान्य रूप है, जो महाकवि वाल्मीकि के लिए प्रयोग होता है।
वहीं, 'अभीनेत्री' में त्रुटि है क्योंकि सही शब्द 'अभिनेत्री' होता है, जिसका अर्थ है महिला नायक या महिला कलाकार। इसी प्रकार, 'संवीधान' एक अशुद्ध शब्द है, इसे 'संविधान' लिखा और बोला जाना चाहिए, जिसका अर्थ है किसी देश या संगठन का नियम और कानून।
'साहीत्य' भी एक अशुद्ध शब्द है; इसका सही रूप 'साहित्य' है, जिसका अर्थ है लेखन कला, साहित्यिक रचना या साहित्य।
इस प्रकार, भाषा की शुद्धता बनाए रखने के लिए सही शब्दों और उनके उच्चारण का ध्यान रखना आवश्यक होता है। यह न केवल संप्रेषण को स्पष्ट बनाता है, बल्कि भाषा की सुंदरता और सम्मान को भी बढ़ाता है।