'आस्तिक' शब्द शुद्ध है, जिसका अर्थ है वह व्यक्ति जो ईश्वर या धार्मिक विश्वासों पर विश्वास करता है। 'नास्तीक' इसका विपरीत है, जो ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है।
आस्तिक व्यक्ति धार्मिक आस्थाओं, परंपराओं और ईश्वर की उपस्थिति को स्वीकार करता है, और उसके जीवन में धर्म का महत्त्व होता है। इसके विपरीत, नास्तीक वह होता है जो ईश्वर, धर्म या किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक शक्ति पर विश्वास नहीं करता। ये दोनों शब्द भारतीय दर्शन और धर्मशास्त्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहाँ आस्तिकता और नास्तिकता के विभिन्न दृष्टिकोण और विचार विमर्श होते हैं। हिंदी भाषा और साहित्य में इन शब्दों का प्रयोग व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं और विश्व दृष्टि को दर्शाने के लिए किया जाता है।