निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
कल थे कुछ हम बन गए आज अजनबी हैं,
सब द्वार बंद, टूटे संबंध पुराने हैं।
हम सोच रहे यह कैसा नया समाज बना
जब अपने ही घर में हुए हम बिछाने हैं।
है आधी रात अर्थ जग पड़ा अंधेरे में,
सुख की दुनिया सोती, रंगों के घेरे में,
पर दुःख का इंसानी दीपक जलकर कहता
अब ज्यादा देर नहीं है, नए सवेरे में।
हम जीवन की मिट्टी में मिले सितारे हैं
हम राख नहीं हैं राख ढके अंगारे हैं।
जो अग्नि छिपा रखी है हमने गलियों से
हर बार धरा पर उसने प्रलय उतारे हैं।