Question:

नीचे दिए गए संस्कृत श्लोक में से किसी एक का संदर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : नीर-क्षीर-विवेके हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत् । विश्वमिस्मन्नअधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ।। 
 

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'अन्योक्ति' का अर्थ है किसी और के माध्यम से अपनी बात कहना। ऐसे श्लोकों का अनुवाद करते समय शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसका प्रतीकात्मक भावार्थ भी स्पष्ट करना चाहिए। यहाँ हंस विवेकशील व्यक्ति का प्रतीक है और नीर-क्षीर-विवेक न्याय-अन्याय के निर्णय का प्रतीक है।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'अन्योक्तिविलासः' (अन्योक्तियों का सौन्दर्य) नामक पाठ से उद्धृत है। इस श्लोक में हंस के माध्यम से विवेकशील और गुणी मनुष्यों को सम्बोधित करते हुए उन्हें अपने कर्तव्य से विमुख न होने की प्रेरणा दी गई है।
हिन्दी में अनुवाद:
(कवि हंस को सम्बोधित करते हुए कहता है) हे हंस! यदि तुम ही दूध और पानी को अलग करने में आलस्य करोगे, तो इस संसार में अब दूसरा कौन अपने कुल-व्रत (कर्तव्य) का पालन करेगा?
भावार्थ: यदि विद्वान और गुणी व्यक्ति ही अपने विवेक का प्रयोग करके उचित-अनुचित का निर्णय करने में आलस्य करेंगे, तो संसार में अन्य साधारण व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन कैसे करेंगे?
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