Question:

नीचे दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : एतस्मिन्नेव काले तस्य ग्रामीणस्य ग्रामः आगतः । स विहसन् रेलयानात् अवतीर्य स्वग्रामं प्रति अचलत् । नागरिकः लज्जितः भूत्वा तूष्णीम् अतिष्ठत् । सर्वे यात्रिणः वाचालं तं नागरिकं दृष्ट्वा अहसन् । तदा स नागरिकः अन्वभवत् यत् ज्ञानं सर्वत्र सम्भवति । 
 

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अनुवाद करते समय क्रिया के काल (tense) और कर्ता (subject) को पहचानना आवश्यक है। यहाँ 'अचलत्', 'अतिष्ठत्', 'अहसन्', 'अन्वभवत्' सभी भूतकाल (लङ् लकार) की क्रियाएँ हैं, जो अनुवाद को भूतकाल में रखने का संकेत देती हैं।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

संदर्भ:
प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' में संकलित 'प्रबुद्धो ग्रामीणः' (बुद्धिमान ग्रामीण) नामक पाठ से लिया गया है। इसमें एक चतुर ग्रामीण द्वारा अपनी पहेली से शहरी नागरिक को पराजित करने और नागरिक के ज्ञान के अभिमान को तोड़ने का प्रसंग है।
हिन्दी में अनुवाद:
इसी समय उस ग्रामीण का गाँव आ गया। वह हँसता हुआ रेलगाड़ी से उतरकर अपने गाँव की ओर चल पड़ा। नागरिक लज्जित होकर चुपचाप बैठ गया। सभी यात्री उस बहुत बोलने वाले नागरिक को देखकर हँसने लगे। तब उस नागरिक ने अनुभव किया कि ज्ञान सब जगह संभव है।
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