कृत पूर्ण कीजिए :
\[\begin{array}{|c|c|c|} \hline \textbf{सिद्ध शब्द} & \textbf{सिद्ध-विभेद} & \textbf{सिद्ध भेद} \\ \hline \text{सदा + एव} & \text{सदैव} & \text{हमेशा/निरंतर} \\ \hline \end{array}\]
अधवा
\[\begin{array}{|c|c|c|} \hline \textbf{सिद्ध शब्द} & \textbf{सिद्ध-विभेद} & \textbf{सिद्ध भेद} \\ \hline \text{सदा + एव} & \text{सदैव} & \text{हमेशा/निरंतर} \\ \hline \end{array}\]
निम्नलिखित पठित गद्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी राघवेंद्र पत्नी-बच्चों सहित अपने पैतृक कस्बे में
आया हुआ है। नौकरी से छुट्टियाँ न मिल पाने की मजबूरी के चलते वह चाहकर भी
हफ्ता-दस दिन से ज्यादा यहाँ नहीं रुक पाता है लेकिन उसकी इच्छा रहती है कि अम्मा-बाबू जी
पूरे साल नहीं तो साल में दो-तीन महीने तो उसके साथ मुंबई में जरूर रहें। बच्चों को संयुक्त परिवार मिले, दादा-दादी का
भरपूर प्यार मिले। अनिता, उसकी पत्नी भी यही
चाहती है। यही सोचकर उन्होंने पाँच कमरों का फ्लैट खरीदा है पर न जाने क्यों अम्मा-बाबू जी
वहाँ बहुत कम जाते हैं। साल भर में एकाध बार, वह भी चंद दिनों के लिए।
"बाबू जी, आप और अम्मा चार-छह दिनों के लिए नहीं, चार-छह महीनों के लिए
आया कीजिए। इतनी जल्दी लौट जाते हैं तो मन कचोटने-सा लगता है।"
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
मंत्री :महाराज, लोगों की पहली शिकायत यही है कि पानी अब निर्मल
नहीं रहा है। यह नदियों और गह्वरों में बहते समय गंदगी और
बीमारियाँ अपने साथ बहाकर सब जगह पहुँचा देता है।
पानी :महाराज, ये लोग पहले की तरह पानी की रखवाली नहीं करते हैं।
पशुओं को जोहड़ के भीतर तैरने छोड़ जाते हैं। पशु अपनी गंदगी
तालाब में छोड़ जाते हैं। गाँव की दूसरी गंदगी भी तालाब में फेंक
दी जाती हैं। नदियों में कारखानों की गंदगी व शहर के गंदे नाले
का पानी छोड़ा जाता है। महाराज, मैं अपने आप गंदा नहीं होता।
मुझसे शिकायत करने वाले ही गंदा और दूषित करते हैं।
महाराज : भाइयो, आपके पास इसका क्या जवाब है ? (लोग आपस में फुस-फुसाकर बातें करते हैं, फिर उनमें से एक बोलता है।)
एक' : महाराज, यह तो मान लिया पर कहीं बरसना, कहीं नहीं बरसना, यह तो इस पानी की मनमानी है।
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल॥
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं।।
जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ।
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ।।
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, बाको है तिरसूल॥।
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
क्षमामयी, तू दयामयी है, क्षेममयी है,
सुधामयी, वात्सल्यमयी, तू प्रेममयी है।
विभक्शालिनी, विश्वपालिनी, दुखहर्ती है,
भयनिवारिणी, शांतिकारिणी, सुखकर्ती है।
हे शरणदायिनी देवी तू, करती सबका त्राण है।
हे मातृभूमि संतान हम, तू जननी, तू प्राण है।।
मानक वर्तनी के अनुसार सही शब्द छाँटकर लिखिए :
मस्तिष्क / मसतिश्क / मसतीश्क / मकसिष्क
मानक वर्तनी के अनुसार सही शब्द छाँटकर लिखिए :
मस्तिष्क / मसतिश्क / मसतीश्क / मकसिष्क
मानक वर्तनी के अनुसार सही शब्द छाँटकर लिखिए :
विद्यापीठ / विद्यापीठ / विद्यापिठ / विद्यपीठ
निम्नलिखित अव्ययों में से किसी एक अव्यय का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए :
कभी-कभी
निम्नलिखित अव्ययों में से किसी एक अव्यय का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए :
पास
अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए :
(फूला न समाना, दंग रह जाना)
बेला के सफेद-सफेद फूलों को देखकर लेखक बहुत प्रसन्न हो गए।