Comprehension

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : 
लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल॥
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं।।
जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ।
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ।।
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, बाको है तिरसूल॥।
 

Question: 1

उचित जोड़ियाँ मिलाइए:
 

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काव्य में एक गहरे अर्थ के साथ बिंब का प्रयोग किया गया है। "कस्तूरी" और "मृग" के जोड़ में प्रतीकात्मक अर्थ है और "काँटा" और "फूल" में विरोधाभास को व्यक्त किया गया है।
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Solution and Explanation

\[\begin{array}{|c|c|c|} \hline \textbf{अ} & \textbf{उत्तर} & \textbf{आ} \\ \hline \text{1. कस्तूरी} & \text{परसामां} & \text{मृग} \\ \hline \text{2. काँटा} & \text{फूल} & \text{पानी} \\ \hline \text{3. लाल} & \text{मुँह} & \text{किनारा} \\ \hline \text{4. बौरा} & \text{किनारा} & \text{किनारा} \\ \hline \end{array}\]

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Question: 2

पद्यांश के अंतिम दोहे का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 
 

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अच्छे कर्मों से जीवन में सुख और संतोष मिलता है, जबकि बुरे कर्मों से केवल कष्ट और निराशा।
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Solution and Explanation

इस दोहे का अर्थ है कि जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, वही सही मार्ग पर चलता है और उसे जीवन में सफलता मिलती है। जो बुरे कर्म करता है, वह हमेशा दुखी रहता है। इसलिए हमें अच्छे कार्यों की ओर अग्रसर होना चाहिए।
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