Question:

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में जीजी का कोई पूजा-विधान, त्योहार अनुष्ठान लेखक के बिना पूरा नहीं होता था, क्यों? आपके घर में भी क्या यही स्थिति है और आप इस संदर्भ में क्या करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर में निजी अनुभव जोड़ने से उत्तर की विश्वसनीयता और भावनात्मक गहराई दोनों बढ़ती हैं।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में जीजी की धार्मिक आस्था और परंपराओं से गहरी जुड़ाव को दर्शाया गया है। लेखक चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी उपस्थिति उनके लिए आवश्यक थी। यह केवल पारंपरिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं था, बल्कि उसमें प्रेम, विश्वास और अपनेपन की भावना जुड़ी हुई थी।
जीजी हर पूजा में लेखक को इसलिए सम्मिलित करती थीं क्योंकि उनके लिए यह संबंध की पुष्टि थी — पूजा केवल कर्मकांड नहीं, भावनात्मक संवाद था।
आज के समय में भी कई घरों में बुज़ुर्ग या माता-पिता की यही भावना होती है — वे चाहते हैं कि पारिवारिक मूल्य बच्चों में भी रहें। मेरे घर में भी त्योहारों में परिवार के सभी सदस्य एक साथ सम्मिलित होते हैं, और मैं स्वयं प्रयास करता हूँ कि इस सांस्कृतिक परंपरा में सक्रिय रूप से भाग लूँ।
इसलिए यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपनों से जुड़े रहने का माध्यम है।
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