Question:

‘झोंपड़ी जला दिए जाने के बाद भी सूरदास प्रतिरोध में नहीं पुनर्निर्माण में विश्वास रखता है।’ सूरदास जैसे व्यक्ति की वर्तमान समय में क्या प्रासंगिकता है ? टिप्पणी कीजिए। 
 

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सूरदास का चरित्र दिखाता है कि सच्चा बदलाव प्रतिरोध से नहीं, सहिष्णु और सकारात्मक पुनर्निर्माण से आता है।
Updated On: Jul 21, 2025
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Solution and Explanation

सूरदास का चरित्र एक ऐसे व्यक्ति का प्रतीक है जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद नकारात्मकता या प्रतिशोध का मार्ग नहीं अपनाता।
जब उसकी झोंपड़ी जला दी जाती है, तब भी वह टूटता नहीं, बल्कि नए सिरे से निर्माण की बात करता है।
वह आत्मबल, धैर्य, और रचनात्मक दृष्टिकोण का परिचायक है।
आज के समाज में, जहाँ हर छोटी बात पर विरोध, हिंसा और द्वेष का वातावरण बन जाता है, वहाँ सूरदास जैसी सोच रखने वाले व्यक्ति अत्यंत प्रासंगिक हैं।
वे हमें सिखाते हैं कि शांति, सहिष्णुता और आशावाद ही समाज को आगे ले जा सकते हैं।
उनकी दृष्टि विकासवादी है — जहाँ प्रतिरोध नहीं, पुनर्निर्माण प्राथमिकता है।
वर्तमान समय में ऐसे संतुलित दृष्टिकोण की अत्यंत आवश्यकता है, जो समाज में सकारात्मकता और शांति ला सके।
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