Question:

‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर गंगा किनारे रहने वाले लोगों की आजीविका के तरीकों पर प्रकाश डालिए। 
 

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कहानी और पाठ्यांशों के पात्र, प्रतीक और स्थल केवल कथा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की सजीव अभिव्यक्तियाँ होते हैं — उत्तर में उनका गहराई से विश्लेषण करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘दूसरा देवदास’ पाठ में गंगा किनारे बसे लोगों की जीवन शैली और आजीविका का मार्मिक चित्रण किया गया है। ये लोग मुख्यतः नाव चलाने, मछली पकड़ने, गंगाजल भरने और तीर्थयात्रियों की सेवा करने जैसे कार्यों से अपनी आजीविका चलाते हैं।
उनकी आय अत्यंत सीमित होती है, लेकिन उनके जीवन में एक आत्मगौरव और सांस्कृतिक मूल्य विद्यमान रहते हैं। देवदास स्वयं गंगाजल बेचकर अपना जीवन यापन करता है और गंगा के प्रति उसमें गहरी श्रद्धा है।
ये लोग गंगा से केवल जल नहीं, बल्कि आस्था, भोजन, और आजीविका – सब कुछ प्राप्त करते हैं। गंगा उनके लिए एक देवी है, एक माँ है, और एक जीविका का साधन भी।
इस प्रकार, पाठ में गंगा तट के जनजीवन की झलक केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी प्रस्तुत की गई है।
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