दिए गए संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ–सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
(क) किंचिद् गुरुतरं भूमेः किंचिद् उच्चतरं च खात् ?
किंचिद् शीघ्रतरं वातात् किंचिद् बहुतरं तृणात् ।
माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा ।
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥
अथवा
(ख) हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जितवा वा भोक्ष्यसे महीम् ।
निराशिर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥
अपने निवास स्थान के आसपास / मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर/जनपद के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।
निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए: मैथिलीशरण गुप्त
निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए: रामधारी सिंह 'दिनकर'
मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' के चरित्र की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
नीचे दिए गये पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश
माता गुरुतरा भूमेः ख्यात् पितोच्चतरस्तथा।
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात्॥
नीचे दिए गये पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥
निम्नलिखित में से किसी एक संस्कृत पद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश 1 –
अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः।
अमुखः स्पष्टवक्ता च यो जानाति स पण्डितः॥
अथवा
पद्यांश 2 –
मानं हित्वा प्रियो भवति क्रोधं हित्वा न शोचति।
कामं हित्वार्थवान् भवति लोभं हित्वा सुखी भवेत्॥
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर गाँधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
दिए गए संस्कृत पद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।