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‘देवसेना का गीत’ वेदना और निराशा के मनोभावों का एक चित्र है – कैसे ?

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भावात्मक कविता के विश्लेषण में मानसिक दशा, सामाजिक संदर्भ और प्रतीकों की व्याख्या करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘देवसेना का गीत’ एक ऐसी नायिका की आंतरिक पीड़ा और निराशा को व्यक्त करता है जो युद्ध, प्रेम और वियोग के त्रिकोण में फँसी हुई है। देवसेना की पीड़ा केवल एक नारी की वेदना नहीं, बल्कि उस युग की राजनैतिक और सामाजिक विडंबनाओं का भी प्रतीक है।
गीत में उसकी आवाज़ में जो टूटन है, वह केवल प्रेम की कमी से उत्पन्न नहीं हुई — वह विश्वासघात, युद्ध की विभीषिका और मन की असहायता की परिणति है। देवसेना अपने प्रिय के लिए गीत गाती है, परंतु वह गीत प्रेम से अधिक वेदना और टूटन का प्रतीक बन जाता है।
कविता के शब्दों में निराशा का ऐसा चित्र है कि पाठक भी उसकी पीड़ा को अनुभव कर सकता है। यह गीत स्त्री-विमर्श और आंतरिक द्वंद्व का एक सशक्त उदाहरण है।
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