'चक्रनपाणि' शब्द एक बहुव्रीहि समास है, जिसमें 'चक्र' और 'नपाणि' का संयोजन हुआ है। यह समास किसी व्यक्ति या वस्तु के विशेष गुण को व्यक्त करता है, जैसे भगवान विष्णु का एक प्रसिद्ध रूप 'चक्रनपाणि' है, जिसका अर्थ होता है 'चक्र धारण करने वाला'।
बहुव्रीहि समास वह समास होता है, जिसमें दोनों घटक शब्दों का मिलकर कोई नया विशिष्ट अर्थ उत्पन्न होता है। 'चक्रनपाणि' में 'चक्र' (जिसका अर्थ है घूमता हुआ या वर्म) और 'नपाणि' (जिसका अर्थ है हाथ या पाणि) शब्द मिलकर एक विशेष रूप को व्यक्त करते हैं। 'चक्रनपाणि' भगवान विष्णु के रूप में 'चक्र धारण करने वाले' का प्रतीक है, जो उनके महान गुणों और शक्ति का प्रतीक है। इस समास में दोनों शब्द एक साथ मिलकर भगवान विष्णु की अद्वितीय विशेषता को व्यक्त करते हैं।