‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के आधार पर लिखिए कि टी.वी. पर शारीरिक पीड़ा झेलने वाले व्यक्ति से जुड़ा साक्षात्कार क्या सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम कहा जा सकता है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कवि ने आधुनिक मीडिया की संवेदनहीनता को उजागर किया है। टी.वी. कार्यक्रम में पीड़ित व्यक्ति का साक्षात्कार करना अगर केवल दर्शकों को भावुक करने या टीआरपी बढ़ाने के लिए हो, तो यह सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता।
यदि यह कार्यक्रम अपाहिजों के अधिकार, उनके संघर्ष, या उनके लिए समाज की जिम्मेदारियों को सामने लाने का माध्यम बने, तभी यह सामाजिक उद्देश्य से युक्त माना जा सकता है।
अतः ऐसे कार्यक्रम का मूल्यांकन उसके उद्देश्य, प्रस्तुति और प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए न कि केवल दृश्य प्रभाव के आधार पर।
‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ — से अभिप्राय है —
‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ — पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है —
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
कथन: प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।
कारण: प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।
प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?
रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?
राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
“जिन विचारों को कह डालना हमारे लिए कठिन नहीं होता, उन्हें लिख डालने का नियंत्रण एक चुनौती की तरह लगता है” क्यों ? स्पष्ट कीजिए।
रेडियो नाटक में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।