Question:

‘बिसनाथ दूध कटहा हो गए। उनका दूध कट गया।’ — इस कथन का आशय स्पष्ट करते हुए बिसनाथ के जीवन में आए संकट का स्वरूप स्पष्ट कीजिए। इस कथन के आलोक में आप बिसनाथ के प्रति कैसा महसूस करते हैं? संक्षेप में लिखिए। 
 

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प्रतीकात्मक वाक्य जैसे ‘दूध कट गया’ को केवल घटनात्मक रूप में न देखें, वह सामाजिक बहिष्कार और साजिश का संकेत है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

यह कथन ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ से लिया गया है, जिसमें लेखक ने ग्रामीण समाज की जातिगत, राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को उजागर किया है। बिसनाथ एक सरल, मेहनती, आत्मनिर्भर और ईमानदार दूधवाला है। वह गायें पालता है और ईमानदारी से दूध बेचकर जीवन यापन करता है। उसका कोई राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव नहीं है, और वह सत्ता से डरने वाला नहीं, बल्कि सजग और सच बोलने वाला नागरिक है।
जब गाँव के प्रधान और अन्य सत्ताधारी लोग सूरदास की झोंपड़ी हटाने की योजना बनाते हैं, तो बिसनाथ इसका विरोध करता है और झोंपड़ी के पक्ष में खड़ा होता है। यह बात सत्ता-धारकों को पसंद नहीं आती। वे बिसनाथ को सबक सिखाने के लिए उस पर एक सामाजिक दाग लगा देते हैं — कि वह ‘दूध कटहा’ है, यानी उसके कारण दूध खराब हो जाता है।
ग्रामीण समाज में ‘दूध कटहा’ कहना सामाजिक बहिष्कार के बराबर है। यह आरोप बिना प्रमाण के लगाया गया, परंतु समाज ने बिना सोचे समझे इसे स्वीकार कर लिया। परिणामस्वरूप, लोग बिसनाथ से दूध लेना बंद कर देते हैं और उसकी आजीविका पर संकट आ जाता है।
यह संकट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक अपमान, पहचान का हनन और असहायता का प्रतीक है। यह दिखाता है कि एक आम आदमी किस तरह सत्ता की चालों का शिकार बनता है, और समाज कितनी जल्दी अफवाहों और सामाजिक रूढ़ियों पर विश्वास कर लेता है।
इस कथन के आलोक में बिसनाथ के प्रति मेरे मन में गहरी करुणा, सम्मान और चिंता का भाव उत्पन्न होता है। वह सच्चाई और न्याय के पक्ष में खड़ा होता है, लेकिन उसका प्रतिफल उसे सामाजिक बहिष्कार और आजीविका के छिन जाने के रूप में मिलता है। बिसनाथ आधुनिक भारतीय समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधि है जो सच बोलने की सजा झेलता है।
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