Question:

भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी में आग क्यों लगाई ? वह अपने कार्य को उचित क्यों मान रहा था ? आपके विचार से भैरों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाना चाहिए और क्यों ? 
 

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ऐसे प्रश्नों में कथानक की गहराई, चरित्र के दृष्टिकोण और अपने विचार तीनों का संतुलन ज़रूरी होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी में आग इसलिए लगाई क्योंकि वह गाँव के नए निर्माण कार्यों में बाधा बना हुआ था। सूरदास के घर को हटाए बिना विकास कार्य आगे नहीं बढ़ सकता था।
भैरों अपने कार्य को उचित इसलिए मानता है क्योंकि वह उसे ‘लोक-हित’ और ‘विकास’ से जोड़कर देखता है। उसके अनुसार यदि एक व्यक्ति के नुकसान से गाँव का भला होता है, तो वह न्यायसंगत है।
मेरे विचार में भैरों का यह कार्य नैतिक रूप से अनुचित है। किसी भी विकास कार्य के लिए ज़बरदस्ती और हिंसा उचित नहीं है। उसे संवाद और सहयोग से हल किया जाना चाहिए था।
भैरों को कानून के अनुसार दंड तो मिलना चाहिए, पर साथ ही उसे सामाजिक संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जानी चाहिए ताकि वह भविष्य में जन-हित और व्यक्ति-हित के बीच संतुलन समझ सके।
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