बाज़ार के आकर्षण से बचने के लिए ‘बाज़ार-दर्शन’ पाठ में दिए गए उपायों का उल्लेख करते हुए लिखिए कि आप उनसे कहाँ तक सहमत हैं।
‘बाज़ार-दर्शन’ पाठ में लेखक ने बाज़ार की चकाचौंध और उपभोक्तावादी संस्कृति से उत्पन्न झूठी आवश्यकताओं की ओर संकेत किया है। लेखक के अनुसार बाज़ार वस्तुओं की आवश्यकता नहीं, अपितु लालसा और दिखावा पैदा करता है।
लेखक ने इससे बचने के लिए — वस्तुओं की उपयोगिता का मूल्यांकन, आवश्यकता के अनुसार ही खरीदारी, आत्मनिर्भरता, और विज्ञापन से प्रभावित न होने जैसे उपाय सुझाए हैं।
मैं लेखक के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि आज बाज़ार उपभोक्ताओं को मानसिक रूप से नियंत्रित करता है और अनावश्यक खर्च की ओर धकेलता है। यदि हम सजग रहें और आवश्यकता आधारित उपभोग को अपनाएँ, तो हम बाज़ार के फंदे से बच सकते हैं।
‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ — से अभिप्राय है —
‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ — पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है —
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
कथन: प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।
कारण: प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।
प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?
रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?
राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
“जिन विचारों को कह डालना हमारे लिए कठिन नहीं होता, उन्हें लिख डालने का नियंत्रण एक चुनौती की तरह लगता है” क्यों ? स्पष्ट कीजिए।
रेडियो नाटक में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।