बाज़ार के आकर्षण से बचने के लिए ‘बाज़ार-दर्शन’ पाठ में दिए गए उपायों का उल्लेख करते हुए लिखिए कि आप उनसे कहाँ तक सहमत हैं।
‘बाज़ार-दर्शन’ पाठ में लेखक ने बाज़ार की चकाचौंध और उपभोक्तावादी संस्कृति से उत्पन्न झूठी आवश्यकताओं की ओर संकेत किया है। लेखक के अनुसार बाज़ार वस्तुओं की आवश्यकता नहीं, अपितु लालसा और दिखावा पैदा करता है।
लेखक ने इससे बचने के लिए — वस्तुओं की उपयोगिता का मूल्यांकन, आवश्यकता के अनुसार ही खरीदारी, आत्मनिर्भरता, और विज्ञापन से प्रभावित न होने जैसे उपाय सुझाए हैं।
मैं लेखक के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि आज बाज़ार उपभोक्ताओं को मानसिक रूप से नियंत्रित करता है और अनावश्यक खर्च की ओर धकेलता है। यदि हम सजग रहें और आवश्यकता आधारित उपभोग को अपनाएँ, तो हम बाज़ार के फंदे से बच सकते हैं।
संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति को स्पष्ट करते हुए लेखक पर पड़ने वाले इनके प्रभाव को लिखिए। आप दोनों में से किसे महत्त्व देते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति की विराटता का दर्शन है।' - पाठ के दृश्यों के आधार पर इसे स्पष्ट करते हुए लिखिए।
'माता का अँचल' पाठ से बच्चों के किन्हीं दो खेलों और उनके परिवेश का अंतःसंबंध स्पष्ट करते हुए टिप्पणी लिखिए।
फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।