Question:

‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ से उद्धृत कथन ‘तप की राह रेगिस्तान को जाती होगी, मोक्ष की राह वह नहीं है’ — का आशय स्पष्ट कीजिए। 
 

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जीवन में मोक्ष का मार्ग तप या त्याग में नहीं, विवेकपूर्ण संतुलन में होता है — यही इस कथन का सार है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

यह कथन बाजार के यथार्थ और जीवन के बीच संबंध को दर्शाता है। यहाँ ‘तप की राह’ और ‘रेगिस्तान’ प्रतीकात्मक हैं। लेखक यह कहना चाहता है कि अत्यधिक त्याग, तपस्या या संसार से विमुख होना ही मोक्ष नहीं है।
जो लोग यह मानते हैं कि भौतिकता से दूर होकर ही मोक्ष मिलेगा, वे एकतरफा सोचते हैं। वास्तव में मोक्ष की राह जीवन के यथार्थ और समाज के मध्य से होकर गुजरती है — जहाँ व्यक्ति संतुलन बनाए रखता है।
बाज़ार जीवन का यथार्थ है — वहाँ दिखावा है, आकर्षण है, पर साथ ही वह मनुष्य की आवश्यकताओं का केंद्र भी है। इसलिए तप या विरक्ति को ही अंतिम मार्ग मान लेना एक भ्रम है। लेखक व्यावहारिकता और संतुलन को ही जीवन-मुक्ति की सच्ची राह मानते हैं।
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