‘बात सीधी थी पर’ कविता में भाषा के चक्कर में ‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ से क्या अभिप्राय है ?
‘बात सीधी थी पर’ कविता में कवि यह कहता है कि कभी-कभी किसी बात को कहने की प्रक्रिया इतनी जटिल हो जाती है कि उसकी सादगी और स्पष्टता नष्ट हो जाती है।
‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ का आशय है — मूल भाव या मुद्दा संवाद की शैली, भाषा या विधि के कारण विकृत हो जाना। ऐसा तब होता है जब व्यक्ति स्पष्ट कहने की बजाय घुमा-फिराकर या कृत्रिम भाषा में बात कहने लगे।
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