‘बात सीधी थी पर’ कविता में भाषा के चक्कर में ‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ से क्या अभिप्राय है ?
‘बात सीधी थी पर’ कविता में कवि यह कहता है कि कभी-कभी किसी बात को कहने की प्रक्रिया इतनी जटिल हो जाती है कि उसकी सादगी और स्पष्टता नष्ट हो जाती है।
‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ का आशय है — मूल भाव या मुद्दा संवाद की शैली, भाषा या विधि के कारण विकृत हो जाना। ऐसा तब होता है जब व्यक्ति स्पष्ट कहने की बजाय घुमा-फिराकर या कृत्रिम भाषा में बात कहने लगे।
‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ — से अभिप्राय है —
‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ — पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है —
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
कथन: प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।
कारण: प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।
प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?
रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?
राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
“जिन विचारों को कह डालना हमारे लिए कठिन नहीं होता, उन्हें लिख डालने का नियंत्रण एक चुनौती की तरह लगता है” क्यों ? स्पष्ट कीजिए।
रेडियो नाटक में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।