Question:

‘आवश्यकता से अधिक खरीदारियाँ ही बाज़ार में शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में तर्क सहित उत्तर दीजिए। 
 

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किसी निबंधात्मक पाठ के प्रश्न में विचार + उदाहरण + निष्कर्ष — इन तीनों का संतुलन बनाए रखें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘बाज़ार दर्शन’ पाठ उपभोक्तावादी प्रवृत्तियों की आलोचना करता है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि बाज़ार का असंतुलन तब उत्पन्न होता है जब आवश्यकताओं के बजाय विलासिता और आकर्षण की पूर्ति के लिए अनावश्यक वस्तुओं की खरीद की जाती है।
जब उपभोक्ता बिना सोचे-समझे केवल प्रचार और दिखावे के चलते वस्तुएँ खरीदता है, तब बाज़ार केवल मुनाफ़ाखोरी का अड्डा बन जाता है। उत्पादनकर्ता गुणवत्ता की जगह मात्र लाभ पर केंद्रित हो जाते हैं।
इस तरह आवश्यकता से अधिक खरीदारियाँ बाजार में मांग की अस्वाभाविकता पैदा कर शोषण का रूप ले लेती हैं — उपभोक्ता भ्रमित होता है, असली ज़रूरतें पीछे छूट जाती हैं और पूँजीपति वर्ग लाभ का सर्वोच्च अधिकारी बन जाता है।
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