Comprehension

नि:शब्द धीमी चाल और सदियों का साक्षी – जब कोई प्राणी हमारी धरती पर प्रकृति का सबसे शांत लेकिन सबसे मज़बूत प्रहरी बनकर खड़ा हो, तो उसका महत्त्व केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं रह जाता, वह हमारी संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा बन जाता है। कछुआ, जो समय की रेत पर अपने धैर्य और दीर्घायु के पदचिह्न छोड़ता आया है, आज खतरे में है। 23 मई को मनाया जाने वाला विश्व कछुआ दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि पुकार है, उस मौन जीवन के लिए, जिसे हमने वर्षों तक नज़रअंदाज किया और जो आज हमसे बचाव की गुहार कर रहा है।

मान्यता है कि कछुए धरती पर करोड़ों वर्षों से अस्तित्व में हैं। उन्होंने हिम युगों, महाविनाशों और भूगर्भीय परिवर्तनों को झेला है। उनके अस्तित्व की स्थिरता, उनकी धीमी लेकिन स्थायी जीवन-शैली का प्रमाण है। मगर दुखद है कि आज जिन संकटों का वे सामना कर रहे हैं वे किसी प्राकृतिक आपदा के नहीं, बल्कि मानवीय लालच और लापरवाही के कारण हैं। विश्व में ज्ञात 350 से अधिक कछुआ प्रजातियों में से लगभग 60 फीसदी प्रजातियाँ संकटग्रस्त या विलोप के कगार पर हैं। समुद्री कछुए-जैसे मादा ऑलिव रिडले, जो हजारों किलोमीटर तैरकर अंडे देने के लिए ओडिशा तट पर आती है, को जल और प्रकाश प्रदूषण तथा मानवीय हस्तक्षेप से भारी खतरा है। इन मूक प्राणियों के लिए संकट के प्रमुख कारणों में प्लास्टिक प्रदूषण, समुद्री तटों का अतिक्रमण, अवैध व्यापार और जलवायु परिवर्तन है।

कछुआ हमें सिखाता है कि दौड़ना ज़रूरी नहीं, टिके रहना ज़्यादा ज़रूरी है। यह भी कि मौन शक्ति की एक अलग भाषा है, जो शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म से बोलती है। उनकी धीमी चाल में हमें भविष्य की गूँज सुनाई देती है कि यदि हम उन्हें बचा पाए तो खुद को बचा पाएँगे।

Question: 1

गद्यांश के आधार पर कछुए की महत्ता का मुख्य आधार है :

Show Hint

गद्यांश की पहली पंक्ति पढ़िए, जिसमें कछुए को संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा कहा गया है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • नि:शब्द मंद गति
  • उसका शांत स्वभाव
  • जैव-विविधता का अंग
  • संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न और गद्यांश की पहली पंक्ति:
प्रश्न में कछुए की महत्ता का मुख्य आधार पूछा गया है। गद्यांश की पहली पंक्ति में लिखा है कि कछुए का महत्त्व केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं है, वह हमारी संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा बन जाता है।

चरण 2: विकल्प 1 और 2 की जाँच:
‘नि:शब्द मंद गति’ और ‘शांत स्वभाव’ कछुए की विशेषताओं का वर्णन करते हैं, न कि उसकी महत्ता का मुख्य आधार। इसलिए विकल्प 1 और 2 सही नहीं हैं।

चरण 3: विकल्प 3 की जाँच:
‘जैव-विविधता का अंग’ होना कछुए का एक पक्ष है, पर गद्यांश स्वयं कहता है कि उसका महत्त्व इतने तक सीमित नहीं रहता। इसलिए विकल्प 3 भी मुख्य आधार नहीं है।

चरण 4: विकल्प 4 की पुष्टि:
गद्यांश की पंक्ति के अनुसार वह संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा बन जाता है। यही विकल्प 4 में दिया गया है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 4 है : संस्कृति, चेतना और पर्यावरण की आत्मा।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 2

जैव-विविधता से अभिप्राय है :

Show Hint

जैव का अर्थ जीव और विविधता का अर्थ अनेकता है। सभी प्रकार के जीवन को शामिल करने वाला विकल्प चुनिए।
Updated On: Oct 27, 2026
  • सभी प्रकार के जीवन की विविधता
  • पेड़-पौधों की विभिन्न प्रजातियाँ
  • सूक्ष्म जीवों की विभिन्न प्रजातियाँ
  • पशु-पक्षियों के जीवन की विविधता
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द का विग्रह:
जैव-विविधता शब्द ‘जैव’ और ‘विविधता’ से बना है। जैव का अर्थ है जीवों से संबंधित और विविधता का अर्थ है अनेक प्रकार का होना।

चरण 2: गद्यांश के संदर्भ में अर्थ:
गद्यांश में जैव-विविधता का प्रयोग कछुए जैसे प्राणियों, उनके जीवन और प्रकृति के संतुलन के संदर्भ में हुआ है। इसका आशय पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवन से है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
विकल्प 2, 3 और 4 में केवल पेड़-पौधे, केवल सूक्ष्म जीव या केवल पशु-पक्षी बताए गए हैं। ये जीवन के अलग-अलग हिस्से हैं, पूरा अर्थ नहीं हैं। विकल्प 1 में सभी प्रकार के जीवन की विविधता है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इसलिए पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और सूक्ष्म जीव सब इसमें शामिल हैं। विकल्प 1 सबसे पूर्ण और सही अर्थ देता है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प 1 है : सभी प्रकार के जीवन की विविधता।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 3

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : समय की रेत पर अपने धैर्य और दीर्घायु के चिह्न छोड़ने वाले कछुओं का जीवन आज संकट में है।

कारण : उन्होंने हिमयुगों, महाविनाशों और भूगर्भीय परिवर्तनों को झेला है।

Show Hint

दोनों वाक्य गद्यांश में हैं, पर आज का संकट मानवीय लालच से है, हिमयुग झेलने से नहीं। इसलिए कारण व्याख्या नहीं करता।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कारण सही है, किंतु कथन ग़लत है।
  • कथन सही है, किंतु कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: कथन की जाँच:
गद्यांश की पहली पंक्तियों में लिखा है – ‘कछुआ, जो समय की रेत पर अपने धैर्य और दीर्घायु के पदचिह्न छोड़ता आया है, आज खतरे में है।’
इसलिए कथन सही है।

चरण 2: कारण की जाँच:
दूसरे अनुच्छेद में कहा गया है – ‘उन्होंने हिम युगों, महाविनाशों और भूगर्भीय परिवर्तनों को झेला है।’
अतः कारण भी तथ्य के रूप में सही है।

चरण 3: दोनों का संबंध:
कथन का मुख्य भाव यह है कि आज कछुओं का जीवन संकट में है। कारण केवल यह बताता है कि वे करोड़ों वर्षों से टिके रहे हैं, अर्थात उनकी दीर्घायु और सहनशक्ति का प्रमाण देता है।
गद्यांश स्पष्ट कहता है कि आज का संकट किसी प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं, बल्कि मानवीय लालच और लापरवाही के कारण है। इसलिए हिमयुग आदि झेलना आज के संकट की सही व्याख्या नहीं है।

चरण 4: विकल्पों का मिलान:
विकल्प 1 ग़लत है, क्योंकि दोनों सही हैं। विकल्प 2 ग़लत है, क्योंकि कथन ग़लत नहीं है। विकल्प 4 ग़लत है, क्योंकि कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता। विकल्प 3 में कथन सही है और कारण उसकी ग़लत व्याख्या करता है, यही स्थिति यहाँ बनती है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 – कथन सही है, किंतु कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 4

‘मौन शक्ति की एक अलग भाषा है’ – आशय स्पष्ट कीजिए।

Show Hint

अंतिम अनुच्छेद देखिए। शक्ति शोर से नहीं, कर्म और धैर्य से प्रकट होती है।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति कछुओं पर लिखे गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद की है। लेखक कहता है कि कछुआ हमें सिखाता है कि मौन शक्ति की एक अलग भाषा है, जो शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म से बोलती है।

चरण 2: शब्दों का अर्थ:
‘मौन’ का अर्थ है चुप रहना, शोर न करना। ‘अलग भाषा’ का अर्थ है कि शक्ति को प्रकट करने का तरीक़ा बोलना या दिखावा करना नहीं है।

चरण 3: आशय:
सच्ची शक्ति शोर मचाने या बढ़-चढ़कर बोलने में नहीं होती। कछुआ चुपचाप और धीमी चाल से चलकर भी करोड़ों वर्षों से धरती पर टिका हुआ है। उसका धैर्य, उसकी दीर्घायु और उसका लगातार चलते रहना ही उसकी शक्ति के प्रमाण हैं। इसी तरह मनुष्य को भी बोलने से अधिक अपने कर्म से पहचान बनानी चाहिए।

अंतिम उत्तर:
आशय यह है कि शांत रहने वाला व्यक्ति या प्राणी अपनी शक्ति को बातों से नहीं, अपने कर्म, धैर्य और निरंतरता से सिद्ध करता है।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 5

“दौड़ना ज़रूरी नहीं, टिके रहना ज़्यादा ज़रूरी है” – से क्या अभिप्राय है ?

Show Hint

‘दौड़ना’ यानी जल्दबाज़ी और होड़, ‘टिके रहना’ यानी धैर्य और निरंतरता। कछुए का उदाहरण याद कीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
कछुए पर लिखे गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद में लेखक कहता है कि कछुआ हमें सिखाता है कि दौड़ना ज़रूरी नहीं, टिके रहना ज़्यादा ज़रूरी है।

चरण 2: शब्दों के अर्थ:
‘दौड़ना’ यहाँ तेज़ गति, होड़ और जल्दबाज़ी का प्रतीक है। ‘टिके रहना’ का अर्थ है कठिन समय में भी डटे रहना, धैर्य से लगातार बने रहना।

चरण 3: अभिप्राय:
जीवन में केवल तेज़ भागने से सफलता या अस्तित्व सुरक्षित नहीं होता। जो व्यक्ति धैर्य और निरंतरता के साथ कठिनाइयों में भी अपने स्थान पर टिका रहता है, वही लंबे समय तक आगे बढ़ पाता है। कछुआ धीमी गति से चलकर भी करोड़ों वर्षों से इस धरती पर बना हुआ है।

अंतिम उत्तर:
अभिप्राय यह है कि तेज़ गति से अधिक महत्त्व धैर्य, स्थिरता और निरंतरता का है; जो टिकता है, वही अंत में सफल होता है।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 6

कछुओं के संरक्षण हेतु किन्हीं दो उपायों का उल्लेख कीजिए।

Show Hint

गद्यांश में बताए गए खतरे (प्लास्टिक, अतिक्रमण, अवैध व्यापार) देखिए और उनके उलटे उपाय लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: खतरों की पहचान:
गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में कछुओं के लिए संकट के प्रमुख कारण बताए गए हैं – प्लास्टिक प्रदूषण, समुद्री तटों का अतिक्रमण, अवैध व्यापार और जलवायु परिवर्तन। साथ ही जल और प्रकाश प्रदूषण तथा मानवीय हस्तक्षेप का भी उल्लेख है।

चरण 2: उपाय निकालना:
संरक्षण का अर्थ इन्हीं कारणों को दूर करना है। इसलिए गद्यांश के आधार पर उपाय इस प्रकार बनते हैं।

चरण 3: दो उपाय:
1. समुद्र और नदियों में प्लास्टिक तथा अन्य कचरा डालना रोका जाए, ताकि जल प्रदूषण कम हो।
2. कछुओं के अवैध शिकार और व्यापार पर कठोर कानून लगाया जाए तथा समुद्री तटों पर अतिक्रमण रोका जाए, जहाँ वे अंडे देते हैं।

अंतिम उत्तर:
प्लास्टिक व जल-प्रदूषण पर रोक तथा अवैध व्यापार एवं तटीय अतिक्रमण पर कठोर नियंत्रण – ये दो उपाय कछुओं के संरक्षण में सहायक हैं।
Was this answer helpful?
0
0
Question: 7

प्रवासी कछुए भारत में क्यों आते हैं ? इन्हें किससे खतरा है ?

Show Hint

दूसरे अनुच्छेद में ऑलिव रिडले वाला वाक्य देखिए। उसी में आने का कारण और खतरा दोनों दिए हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश में संबंधित अंश:
दूसरे अनुच्छेद में लिखा है – ‘समुद्री कछुए-जैसे मादा ऑलिव रिडले, जो हजारों किलोमीटर तैरकर अंडे देने के लिए ओडिशा तट पर आती है, को जल और प्रकाश प्रदूषण तथा मानवीय हस्तक्षेप से भारी खतरा है।’

चरण 2: आने का कारण:
प्रवासी समुद्री कछुए, जैसे मादा ऑलिव रिडले, हजारों किलोमीटर की यात्रा करके भारत में ओडिशा के तट पर अंडे देने के लिए आते हैं।

चरण 3: खतरे का कारण:
इन्हें जल प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप से खतरा है। इसके साथ प्लास्टिक प्रदूषण, तटों का अतिक्रमण और अवैध व्यापार भी संकट के कारण बताए गए हैं।

अंतिम उत्तर:
प्रवासी कछुए अंडे देने के लिए भारत के (ओडिशा) तट पर आते हैं और उन्हें जल व प्रकाश प्रदूषण तथा मानवीय हस्तक्षेप से खतरा है।
Was this answer helpful?
0
0