Question:

निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश की लगभग 100 शब्दों में सप्रसंग व्याख्या कीजिए: जरा-सी आहट पाते ही वे एक साथ सिर उठाकर चौंकी हुई निगाहों से हमें देखती हैं - बिलकुल उन युवा हरिणियों की तरह, जिन्हें मैंने एक बार कान्हा के वन्य-स्थल में देखा था। किंतु वे डरती नहीं, भागती नहीं सिर्फ़ विस्मय से मुस्कुराती हैं और फिर सिर झुकाकर अपने काम में डूब जाती हैं। यह समूचा दृश्य इतना साफ़ और सजीव है - अपनी स्वच्छ मांसलता में इतना संपूर्ण और शाश्वत-कि एक क्षण के लिए विश्वास नहीं होता कि आने वाले वर्षों में सब कुछ मटियामेट हो जाएगा - झोंपड़े, खेत, ढोर, आम के पेड़ - सब कुछ गंदी, 'आधुनिक' औद्योगिक कॉलोनी की ईंटों के नीचे दब जाएगा।

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पहले निबंध और लेखक का प्रसंग लिखें, फिर हरिणी की उपमा और औद्योगिक कॉलोनी में सब कुछ दब जाने का भाव समझाएँ।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: व्याख्या की रूपरेखा:
सप्रसंग व्याख्या में पहले प्रसंग, फिर पंक्तियों का भाव और अंत में विशेष बातें लिखी जाती हैं। उत्तर लगभग 100 शब्दों में होना चाहिए।

चरण 2: प्रसंग:
यह गद्यांश निर्मल वर्मा के निबंध 'जहाँ कोई वापसी नहीं' से लिया गया है। लेखक इसमें एक ऐसे गाँव का दृश्य देखता है जो औद्योगिक विकास के कारण उजड़ने वाला है।

चरण 3: व्याख्या:
लेखक बताता है कि जरा-सी आहट पर गाँव की युवा स्त्रियाँ एक साथ सिर उठाकर चौंकी निगाहों से देखती हैं, ठीक कान्हा के वन की हरिणियों की तरह। पर वे डरकर भागती नहीं, केवल विस्मय से मुस्कुराकर फिर काम में लग जाती हैं। यह दृश्य इतना जीवंत, साफ़ और पूर्ण है कि लगता ही नहीं कि यह नष्ट हो सकता है। लेकिन लेखक जानता है कि आने वाले वर्षों में झोंपड़े, खेत, पशु और आम के पेड़ सब आधुनिक औद्योगिक कॉलोनी की ईंटों के नीचे दब जाएँगे।

चरण 4: विशेष:
इसमें उपमा और सजीव चित्रण है। भाषा सरल, काव्यात्मक और भावपूर्ण है। विकास की क़ीमत पर प्रकृति और मानव के विनाश की चिंता प्रकट होती है।

अंतिम उत्तर:
लेखक प्रकृति से जुड़े सरल जीवन की सुंदरता दिखाकर औद्योगीकरण से होने वाले विनाश की चेतावनी देता है।
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