वारि:
‘वारि’ संस्कृत का एक शब्द है, जिसका अर्थ जल, पानी या तरल से संबंधित होता है। यह शब्द संज्ञा के रूप में प्रयोग किया जाता है।
यह ‘वारि’ पद ‘वारि’ शब्द का वचन और विभक्ति के अनुसार रूप परिवर्तित होता है।
‘वारि’ शब्द का रूप ‘विभक्ति’ में परिवर्तन होता है।
विभक्ति और वचन का रूप:
- वचन: 'वारि' शब्द का रूप 'एकवचन' होता है।
- विभक्ति: यह शब्द 'द्वितीया विभक्ति' में प्रयोग होता है, जैसा कि "वारि जल" में देखा जा सकता है।
उदाहरण: "मैं वारि को संग्रहित करता हूँ", यहाँ "वारि" एकवचन, द्वितीया विभक्ति में है।