एवं श्रेणीनां प्राणव्रतां मानां मनोविष्णुं मणोकनिष्ठाम् सम्प्राप्तम्।
कृष्णानं महाश्वे रत्नमालयकेन निर्णगमनं अपरात्मानं महात्मा सुत् घूर्णिर्षान्यं श्रियम् च।
विष्णुकरोधकं पटलेषु श्रद्धाशक्ति एवं कर्मकारिणं इति च लक्षणे अभिवृत्तम।
कृष्णं च इत्य् अन्यां अस्मिन लाभानां स्वं कार्यं मनुष्यवर्गेण स्मृतीनां उच्चेष्टं भद्रलेखा प्रति प्रयत्न।
तूफानों के बीच' रचना की विधा है
महादेवी वर्मा द्वारा रचित रेखाचित्र है
ईर्ष्या का सम्बन्ध प्रतिद्वन्द्विता से होता है, क्योंकि भिखमंगा करोड़पति से ईर्ष्या नहीं करता। यह एक ऐसी बात है, जो ईर्ष्या के पक्ष में भी पड़ सकती है, क्योंकि प्रतिद्वन्द्विता से भी मनुष्य का विकास होता है। किन्तु, अगर आप संसार व्यापी सुयश चाहते हैं तो आप रसेल के मतानुसार, शायद नेपोलियन से स्पर्द्धा करेंगे। मगर, याद रखिए कि नेपोलियन भी सीजर से स्पर्द्धा करता था और सीजर सिकन्दर से तथा सिकन्दर हरकूलस से, जिस हरकूलस के बारे में इतिहासकारों का यह मत है कि वह कभी पैदा ही नहीं हुआ।
जो वृद्ध हो गये हैं, जो अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर हट आए हैं, उन्हें अपने अतीतकाल की स्मृति बड़ी सुखद लगती है। वे अतीत का ही स्वप्न देखते हैं। तरुणों के लिए जैसे भविष्य उज्ज्वल होता है, वैसे ही वृद्धों के लिए अतीत। वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है। तरुण भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं और वृद्ध अतीत को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं। तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक। इन्हीं दोनों के कारण वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है और इसी से वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है।
कालिदास का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए कालिदास की काव्यशैली की विवेचना कीजिए।