गुरोर्धनम्:
‘गुरोर्धनम्’ शब्द का अर्थ है गुरु के समर्पण के द्वारा उच्च शिक्षा और ज्ञान की प्राप्ति की प्रक्रिया। इस शब्द को संस्कृत साहित्य में शिक्षा के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाता है। गुरु का सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा का भाव विद्यार्थी में होना चाहिए।
संज्ञा विधायक सूत्र:
"गुरोर्धनं विद्यां प्राप्ति" — इसका मतलब है, गुरु के आदेशों का पालन करके विद्या प्राप्त करना। यह सूत्र शिक्षा के महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाता है, जहाँ गुरु की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।