Question:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गंभीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सब के प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र नवयुवकों के हृदय में उन सब के प्रति जिज्ञासा की नई किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अथक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए! हमारा यह ध्येय है की राष्ट्र में जितने हाथ हैं, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।
(v) विज्ञान और श्रम के संयोग से राष्ट्र प्रगति के पथ पर कैसे अग्रसर हो सकता है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: मूल भाव:
लेखक के अनुसार विज्ञान और उद्यम दोनों मिलकर राष्ट्र का भौतिक स्वरूप नए ढंग से खड़ा करते हैं।

चरण 2: उत्तर:
विज्ञान राष्ट्र को अपने साधनों की जानकारी और नई तकनीक देता है। श्रम उन साधनों को काम में बदलता है। जब दोनों मिलते हैं तो उत्पादन बढ़ता है और खोज को बल मिलता है। यह काम प्रसन्नता, उत्साह और थके बिना रोज करना चाहिए। जब राष्ट्र का हर हाथ इस काम में लगेगा, तब कोई खाली नहीं रहेगा और राष्ट्र तेजी से प्रगति करेगा।

निष्कर्ष:
विज्ञान और श्रम के संयोग से राष्ट्र सब ओर से उन्नत होता है।
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