Question:

गद्यांश: न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गाँधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन-शैली इसलिये है क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनना और जोर-जबरदस्ती से चुनना-सहने का गुणगान करना अलग बातें हैं।
(v) लेखक किसे एक दूसरे का विरोधी नहीं मानते हैं?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: स्रोत की बात:
यह प्रश्न पाठ ‘हम और हमारा आदर्श’ के विचार से जुड़ा है। दिया गया अंश पूरे पाठ का एक भाग है। इसी पाठ में डॉ. कलाम अपनी मान्यता स्पष्ट करते हैं।

चरण 2: उत्तर:
लेखक भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिकता को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानते। वे कहते हैं कि सादगी का चुनाव अपनी पसंद से होना चाहिए, पर धन-सम्पत्ति और अध्यात्म साथ-साथ चल सकते हैं।

अंतिम उत्तर:
लेखक समृद्धि (भौतिक सुख-साधन) और आध्यात्मिकता को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानते।
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