Question:

सूक्ति की हिन्दी में व्याख्या कीजिए : सूक्ति: एकाकी चिन्तयानो हि, परं श्रेयोऽधिगच्छति ।

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इस प्रकार की सूक्तियों की व्याख्या करते समय, एकांत और चिंतन के मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभों पर जोर दें। आप महान विचारकों का उदाहरण भी दे सकते हैं जिन्होंने एकांत में ज्ञान प्राप्त किया।
Updated On: Nov 17, 2025
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Solution and Explanation

व्याख्या:
प्रसंग: यह सूक्ति मनुस्मृति से ली गई है और एकांत चिंतन के महत्व पर प्रकाश डालती है।
अर्थ: "निश्चित रूप से अकेला चिंतन करने वाला व्यक्ति परम कल्याण (श्रेय) को प्राप्त करता है।"
विस्तृत व्याख्या: इस सूक्ति में यह बताया गया है कि आत्म-कल्याण और परम सत्य की प्राप्ति के लिए एकांत में किया गया चिंतन अत्यंत आवश्यक है। जब व्यक्ति अकेला होता है, तो उसका मन बाहरी कोलाहल और विक्षेपों से मुक्त होता है। ऐसी शांत अवस्था में वह अपने भीतर झाँक सकता है, अपने कर्मों का विश्लेषण कर सकता है, जीवन के गूढ़ रहस्यों पर विचार कर सकता है और सही-गलत का निर्णय कर सकता है।
संसार के सभी महान चिंतकों, दार्शनिकों और ऋषियों ने एकांत में ही गहन चिंतन करके ज्ञान प्राप्त किया है। एकांत में किया गया विचार व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार और परम लक्ष्य की ओर ले जाता है। अतः, सांसारिक भीड़-भाड़ से कुछ समय निकालकर आत्म-चिंतन करना व्यक्ति के परम कल्याण के लिए अनिवार्य है।
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