Question:

निम्नलिखित सूक्तियों में से किसी एक सूक्ति की हिन्दी में व्याख्या कीजिए: 

(क) क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम् । 

(ख) विद्या न याऽप्यच्युतभक्तिकारिणी । 

(ग) समत्वं योग उच्यते ।

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सूक्तियों की व्याख्या करते समय उनके शाब्दिक और भावार्थ दोनों पर ध्यान दें।
Updated On: Nov 19, 2025
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Solution and Explanation

व्याख्या प्रक्रिया: 

सूक्ति (क) की व्याख्या: 
इस सूक्ति का अर्थ है कि अन्य सभी आभूषण समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, लेकिन वाक्पूषण (भाषा) हमेशा स्थायी रहता है। यह सूक्ति हमें यह सिखाती है कि अच्छे वचन और अच्छी भाषा सबसे सुंदर आभूषण हैं, जो कभी खत्म नहीं होते। 
सूक्ति (ख) की व्याख्या: 
इस सूक्ति का अर्थ है कि वह विद्या जो भगवान की भक्ति और सेवा में सहायक हो, वही सबसे उत्तम विद्या है। इसका तात्पर्य है कि ज्ञान का सर्वोत्तम रूप वह है, जो आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर के प्रति समर्पण को बढ़ावा दे। 
सूक्ति (ग) की व्याख्या: यह सूक्ति योग के उद्देश्य को स्पष्ट करती है। "समत्वं योग उच्यते" का अर्थ है कि योग वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति सभी स्थितियों में सम रहता है, न तो सुख में अत्यधिक खुश और न ही दुःख में अत्यधिक दुखी। योग का असली मतलब मानसिक और आत्मिक संतुलन प्राप्त करना है।

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