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हिन्दी में व्याख्या कीजिए : मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ।

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सूक्ति की व्याख्या करते समय यदि आपको उसका पूरा श्लोक याद हो, तो उसका उल्लेख अवश्य करें। इससे आपका उत्तर अधिक प्रभावशाली हो जाता है।
Updated On: Nov 17, 2025
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Solution and Explanation

व्याख्या:
यह सूक्ति 'सुभाषितरत्नानि' पाठ के एक श्लोक का अंश है। इसका पूरा श्लोक है: "पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्। मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥"
इस सूक्ति का अर्थ है - 'मूर्ख लोगों द्वारा पत्थर के टुकड़ों को रत्न का नाम दिया जाता है'।
कवि के अनुसार, इस पृथ्वी पर वास्तविक रूप से केवल तीन ही रत्न हैं - जल, अन्न और मधुर वचन। ये तीनों जीवन के लिए अनिवार्य हैं। परन्तु, मूर्ख लोग इन वास्तविक रत्नों के महत्व को नहीं समझते और वे हीरा, पन्ना, माणिक जैसे पत्थर के टुकड़ों को ही बहुमूल्य रत्न मानते हैं और उनके पीछे भागते हैं। यह सूक्ति हमें जीवन में वास्तविक और कृत्रिम मूल्यों के बीच अन्तर करना सिखाती है।
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