सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ।।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए : गोरज बिराजै भाल लहलही बनमाल आगे गैयाँ पाछे ग्वाल गावै मृदु बानि री । तैसी धुनि बाँसुरी की मधुर मधुर जैसी, बंक चितवनि मंद-मंद मुसकानि री । कदम बिटप के निकट तटिनी के तट अटा चढ़ि चाहि पीत पट फहरानि री । रस बरसावैं तन-तपनि बुझावैं नैन, प्राननि रिझावै वह आवै रसखानि री।।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए : फूल झरता है फूल शब्द नहीं । बच्चा गेंद उछालता है, सदियों के पार लोकती है उसे एक बच्ची । बूढ़ा गाता है एक पद्य, दुहराता है दूसरा बूढ़ा, भूगोल और इतिहास से परे किसी दालान में बैठा हुआ ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
मैया हौं न चरैहौं गाइ । सिगरे ग्वाल घिरावत मोसौं, मेरे पाइ पिराइ । जौ न पत्याहि पूछि बलदाउहिं, अपनी सौंह दिवाइ । यह सुनि माइ जसोदा ग्वालिन, गारी देति रिसाइ । मैं पठवति अपने लरिका कौं, आवै मन बहराइ । सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ, चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ, मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ में देना तुम फेंक । मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : चरन-कमल बंदौं हरि राइ । जाकी कृपा पंगु गिरि लंधै, अन्धे को सब कछु दरसाई । बहिरौ सुनै गूँग पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराइ । सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बन्दौं तिहि पाइ ।।