Step 1: परिभाषा एवं उदाहरण:
रोला एक मात्रिक छन्द है जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, जिनका विभाजन 11 और 13 मात्राओं पर यति के साथ होता है, तथा चरण के अन्त में गुरु-लघु या लघु-गुरु रहना आवश्यक है। यह दोहा के साथ मिलकर 'छप्पय' छन्द भी बनाता है। उदाहरण के रूप में भक्ति एवं वीर काव्य में रोला छन्द के अनेक पद्य मिलते हैं जिनमें 11+13 मात्राओं का विभाजन स्पष्ट देखा जा सकता है।
Final Answer:
उपर्युक्त परिभाषा एवं उदाहरण द्वारा यह अवधारणा स्पष्ट हो जाती है।