Question:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय ।
खलस्य साधोः विपरीतमेतज्ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
यह श्लोक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘सुभाषितरत्नानि’ में संकलित नीतिपरक सुभाषित (सूक्ति) है। इसमें दुर्जन और सज्जन के स्वभाव की तुलना की गई है।

चरण 2: प्रसंग:
कवि यह बताना चाहता है कि विद्या, धन और शक्ति एक ही होने पर भी दुष्ट और सज्जन के हाथ में अलग-अलग काम करती हैं।

चरण 3: शब्दार्थ:
विवादाय = झगड़े के लिए। मदाय = अहंकार के लिए। परेषां परिपीडनाय = दूसरों को कष्ट देने के लिए। खलस्य = दुष्ट का। साधोः = सज्जन का। विपरीतम् = उलटा। रक्षणाय = रक्षा के लिए।

चरण 4: हिन्दी अनुवाद:
दुष्ट व्यक्ति की विद्या बहस और झगड़े के लिए होती है, धन घमंड के लिए होता है और शक्ति दूसरों को सताने के लिए होती है। सज्जन व्यक्ति के लिए ये तीनों बातें इससे उलटी होती हैं। उसकी विद्या ज्ञान के लिए, धन दान के लिए और शक्ति दुर्बलों की रक्षा के लिए होती है।

चरण 5: भावार्थ:
गुण अपने आप अच्छे या बुरे नहीं होते। उनका उपयोग करने वाले का स्वभाव उन्हें अच्छा या बुरा बनाता है।

निष्कर्ष:
हमें विद्या, धन और बल का प्रयोग ज्ञान, दान और रक्षा में करना चाहिए।
Was this answer helpful?
0
0

Top UP Board XII संस्कृत श्लोक Questions

View More Questions