Question:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए: "यदा अयं षोडशवर्षदेशीयः आसीत् तदास्य कनीयसी भगिनी विषूचिकया पशुत्वं गता। वर्षत्रयानन्तरमस्य पितृव्योऽपि दिवंगतः। द्वयोरनयोः मृत्युं दृष्ट्वा आसीदस्य मनसि — कथमहं कथं वायं लोकः मृत्युभयात् मुक्तः स्यादिति चिन्तयतः एवास्य हृदि सहसैव वैराग्यप्रदीपः प्रज्चलितः। एकस्मिन् दिवसे अस्तङ्गते भगवति भास्वति मूलशङ्करः गृहमत्यजत्।"

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: सन्दर्भ:
यह गद्यांश मूलशंकर (स्वामी दयानन्द सरस्वती) के बाल्यकाल की उस घटना से सम्बन्धित है, जिसने उनके मन में वैराग्य जगाया।

Step 2: हिन्दी अनुवाद:
जब यह (मूलशंकर) सोलह वर्ष की आयु का था, तब इसकी छोटी बहन हैजा (विषूचिका) से मृत्यु को प्राप्त हो गई। तीन वर्ष बाद इसके चाचा का भी देहान्त हो गया। इन दोनों की मृत्यु देखकर इसके मन में विचार आया — 'मैं कैसे और यह संसार कैसे मृत्यु के भय से मुक्त हो सकता है' — ऐसा सोचते हुए इसके हृदय में सहसा वैराग्य का दीपक प्रज्ज्वलित हो उठा। एक दिन सूर्यास्त होने पर मूलशंकर ने घर त्याग दिया।

Final Answer:
यह प्रसंग मूलशंकर के मृत्यु-भय से उत्पन्न वैराग्य और गृह-त्याग की कथा का अनुवाद है।
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