Question:

दिए गए श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ॥

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: चुना गया श्लोक:
इस उत्तर में दूसरे श्लोक ‘जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः...’ का ससन्दर्भ अनुवाद दिया गया है।

चरण 2: सन्दर्भ:
यह श्लोक संस्कृत-खण्ड में संकलित नीतिपरक सुभाषित है। इसमें थोड़ा-थोड़ा करके निरन्तर संचय करने का महत्त्व बताया गया है। यह श्लोक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘सुभाषितरत्नानि’ से लिया गया है।

चरण 3: शब्दार्थ:
जलबिन्दुनिपातेन = पानी की बूँदें गिरने से। क्रमशः = धीरे-धीरे। पूर्यते = भर जाता है। घटः = घड़ा। हेतुः = कारण। सर्वविद्यानां = सब विद्याओं का।

चरण 4: हिन्दी अनुवाद:
पानी की एक-एक बूँद गिरने से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है। यही सभी विद्याओं, धर्म और धन की प्राप्ति का कारण है।

चरण 5: भावार्थ:
जैसे बूँद-बूँद से घड़ा भरता है, वैसे ही प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा सीखने, थोड़ा-थोड़ा पुण्य करने और थोड़ा-थोड़ा धन जोड़ने से बड़ा फल मिलता है।

निष्कर्ष:
लगातार परिश्रम और धैर्य से ही विद्या, धर्म और धन का भण्डार भरता है।
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