Question:

'निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल' यह कथन है:

Updated On: Sep 24, 2026
  • महावीर प्रसाद द्विवेदी का
  • भारतेन्दु हरिश्चंद्र का
  • प्रेमघन का
  • प्रतापनारायण मिश्र का
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: पंक्ति का स्रोत:
पूरा दोहा है: ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल॥’ यह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का प्रसिद्ध कथन है।

चरण 2: भाव:
अपनी भाषा की उन्नति ही सब प्रकार की उन्नति की जड़ है। अपनी भाषा का ज्ञान न हो तो हृदय की पीड़ा दूर नहीं होती।

चरण 3: अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
(A) महावीर प्रसाद द्विवेदी: ये भाषा-सुधार के लिए जाने जाते हैं, पर यह पंक्ति उनकी नहीं है।
(C) प्रेमघन: ये भारतेन्दु मंडल के लेखक हैं। यह दोहा उनका नहीं है।
(D) प्रतापनारायण मिश्र: ये भी भारतेन्दु मंडल के हैं, पर यह दोहा उनका नहीं है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (B) भारतेन्दु हरिश्चंद्र का है।
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