Question:

दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
निन्दन्तु नीतिनिपुणाः यदि वा स्तुवन्तु
लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम् ।
अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा
न्यायात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः ॥

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
यह श्लोक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘सुभाषितरत्नानि’ में संकलित है। यह भर्तृहरि के ‘नीतिशतक’ का प्रसिद्ध श्लोक है। इसमें धैर्यवान पुरुषों के दृढ़ स्वभाव का वर्णन है।

चरण 2: शब्दार्थ:
नीतिनिपुणाः = नीति में कुशल लोग। निन्दन्तु = निन्दा करें। स्तुवन्तु = प्रशंसा करें। लक्ष्मीः = धन-सम्पत्ति। समाविशतु = आ जाए। यथेष्टम् = इच्छानुसार। युगान्तरे = युगों बाद। न्याय्यात् पथः = न्याय के मार्ग से। धीराः = धैर्यशाली लोग।

चरण 3: हिन्दी अनुवाद:
नीति जानने वाले लोग चाहे निन्दा करें या प्रशंसा करें। धन-सम्पत्ति चाहे आ जाए या अपनी इच्छा से चली जाए। मृत्यु चाहे आज ही हो जाए या युगों के बाद हो।
फिर भी धैर्यशाली पुरुष न्याय के मार्ग से एक कदम भी इधर-उधर नहीं हटते।

चरण 4: भावार्थ:
सच्चा धीर पुरुष लोगों की निन्दा-स्तुति, लाभ-हानि और जीवन-मरण की चिन्ता नहीं करता। वह हर स्थिति में सत्य और न्याय के पथ पर अडिग रहता है।

निष्कर्ष:
यहाँ श्लोक (निन्दन्तु नीतिनिपुणाः...) का ससन्दर्भ अनुवाद किया गया है।
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